
आगरा। पूरी पटकथा लिख चुकी थी। इसमें हर संभावित सवाल का जवाब था। बस इंतजार था वार्ता का। एक बार जुबां खुली तो हर लफ्ज चुनिंदा था। लम्बे समय तक मोबाइल फोन पर बातचीत के दौरान आंखें नम हो गईं और जुबां उतनी ही सख्त। अंत में समझौते की सभी सम्भावनायें खत्म हो गयीं तो बातचीत भी बंद हो गयी।
सांसद बघेल से सम्पर्क टूट जाने और बगावती तेवरों की भनक लगते ही सपा मुखिया मुलायम सिंह, राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल रात से ही उनसे संपर्क के लिए कोशिशें करते रहे। सारे प्रयास नाकाम देख उन्होंने अपने आगरा स्थित एक रिश्तेदार को सांसद बघेल के घर भेजा। सांसद बघेल ने उन्हें भी आपबीती सुनाई तो वह भी कुछ न बोल सके। हां, इसके बाद सपा मुखिया मुलायम सिंह से फोन पर बात जरूर हुई। मुलायम ने क्या कहा, यह तो पता नहीं चल सका, मगर सांसद बघेल ने पार्टी में नौ साल के सफर के दर्द को जरूर बयां कर डाला। उन्होंने कहा- उन्हें कभी सांसद की हैसियत से समझा ही नहीं गया। तीन बार के लोकसभा सदस्य की खुल्लम-खुल्ला उपेक्षा की गई। न सत्ता ने उन्हें समझा और ना संगठन ने। चुनावी हक को नजरअंदाज किया। उन्होंने कहा कि आगरा में एक काकस किस तरह से गदर काटता रहा, यह किसी से छिपा नहीं है। आपको पूरी खबर होने के बावजूद इनके हौसले बुलंद होते चले गए। पार्टी से अच्छे लोग किनारा कर गए, सिर्फ इस काकस की वजह से। बात करते-करते सांसद बघेल रो पड़े, मगर आवाज में सख्ती कायम रही।
मुलायम ने शायद कहा कि इन सबको पार्टी से निकाल दूंगा। सांसद बघेल बोले-बहुत देर हो चुकी है। जानकारी के अनुसार, प्रो. रामगोपाल ने भी उनसे बात की, मगर उनके सवालों के जवाब देने में मजबूरियां जताईं। सांसद बघेल ने कह दिया कि उन्होंने जो फैसला ले लिया है, उससे अब कदम वापस नहीं खींचेंगे। सपा से अब न फीरोजाबाद सीट चाहिये और ना ही लाल बत्ती।
इसके थोड़ी ही देर बाद मुलायम ने सांसद बघेल की पत्नी मधु बघेल के मोबाइल फोन पर बात की। उन्होंने कहा कि रक्षामंत्री के दौरान उनके कहने पर ही टिकट दी थी। मधु बोलीं कि सीट भी तो निकाल कर दी। मगर तीन बार के सांसद के लिए क्या यही काफी था।