
आगरा। परमाणु करार को लेकर समाजवादी पार्टी का एक और विकेट चटक गया। जलेसर के सांसद एस.पी. सिंह बघेल ने ऐलान किया है कि वह परमाणु करार से सहमत नहीं हैं। संसद में इसके के खिलाफ वोट डालेंगे। उन्होंने अपने अगले राजनीतिक कदम का खुलासा नहीं किया है लेकिन कुछ संकेत दिए कि भविष्य में वह साइकिल की जगह हाथी की सवारी करेंगे।
शुक्रवार को दिल्ली में पार्टी की बैठक से अचानक उठकर चले गए सांसद बघेल ने आज आगरा में अपना फैसला सुना दिया। पत्रकारों से वार्ता में उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया से मिलना और परमाणु करार का समर्थन करना सपा नेतृत्व का व्यक्तिगत निर्णय था। इसके लिए हाईकमान ने सांसदों की बैठक बुलाने की जरूरत भी नहीं समझी। हाईकमान ने सांसदों को 'बंधुआ मजदूर' समझ रखा है। उन्होंने कहा कि यह सबको पता है कि हिंदुस्तान के मुस्लिम अमेरिका के खिलाफ हैं। इसके बावजूद सपा नेतृत्व ने करार को समर्थन देकर पार्टी नीतियों के खिलाफ काम किया है। ऐसे में मेरे लिए परमाणु करार को समर्थन देना सम्भव नहीं है। कांग्रेस और सीबीआई के खिलाफ आग उगलते हुए बागी सांसद ने कहा कि ऐसे मौके पर मुख्यमंत्री मायावती के खिलाफ चार्जशीट की अनुमति मांगना सुनियोजित साजिश है। सीबीआई ने उन लोगों के खिलाफ इस कार्रवाई की अनुमति क्यों नहीं मांगी, जिनके खिलाफ इसी तरह के मामले में सबूत हैं। उल्टे उन्हें क्लीन चिट दे दी है। हकीकत में सीबीआई अब 'कांग्रेस ब्यूरो इन्वेस्टीगेशन' में तब्दील हो गई है। उन्होंने पार्टी की ओर से विंडफाल टैक्स, रुपये की कीमत और स्पेक्ट्रम शुल्क की मांग करने पर भी सवाल उठाये। उन्होंने कहा कि इससे आम जनता को क्या लेना-देना। हकीकत में तो एक औद्योगिक घराने को लाभ पहुंचाने के लिए डील की गई थी।
परमाणु करार के खिलाफ वोट देने का मतलब, समाजवादी पार्टी से बगावत। अब किस पार्टी में जा रहे हैं, के सवाल पर सांसद बघेल का कहना था कि वे तो बाजार में खड़े हैं। राजनीतिक, सामाजिक नजरिये से जो पार्टी आंकेगी। उसके प्रस्ताव पर अपने शुभचिंतकों, समर्थकों से विचार-विमर्श करेंगे। इसके बाद ही अगला कदम उठायेंगे।