
आगरा। डीएपी की कालाबाजारी पर प्रशासन की लगाम कसते ही धंधेखोरों ने नया हथकंडा अपना लिया है। आगरा में उतरने वाली रैक के रूट ही बदलवाने लगे हैं। दूसरे शहरों में उतरने वाली यही खाद मंगाकर महंगे दामों पर किसानों को बेची जा रही है।
डीएपी किल्लत के पिछले कटु अनुभवों को देखते हुये इस बार जनपद में भरपूर मात्रा में खाद का आवंटन हुआ है। वितरण में पारदर्शिता की कोशिशें की जा रही हैं। इसी कोशिश के तहत पिछले दिनों एक रैक आते ही प्रशासन ने अपनी मौजूदगी में डीएपी वितरित कराई। किसानों को एक कट्टा 471 रुपये के हिसाब से डीएपी दिलवाई गई। कमाई पर मार होते देख धंधेखोरों ने दूसरा तरीका अपनाया। सूत्रों के अनुसार, आगरा के खाते में एक रैक और उतरनी थी। मगर ये रैक आगरा के बजाय दूसरे शहर में उतारी गई। फिर इसी खाद को आगरा में मंगाकर बेचने लगे। डीलर को एक कट्टा डीएपी 460 रुपये में मिलती है। बाजार में 471 रुपये में बेचने का नियम है। मगर दूसरे शहरों से मंगाई गई खाद साढ़े पांच सौ प्रति कट्टा बेची जा रही है।
कृषि विभाग के सूत्र बताते हैं कि आगरा में उतरने वाली अगली रैकों का भी यही हाल होने की आशंका है। उस स्थिति में डीएपी की किल्लत होना लाजिमी होगा। वर्तमान में डीएपी भरपूर मात्रा में है। निजी दुकानों और सहकारी समितियों के गोदामों में खाद पहुंच चुकी है। लेकिन यह खाद किसानों को नहीं मिल पा रही है। जनपद के दूरस्थ इलाकों में किसान अभी भी महंगी दरों पर डीएपी खरीदने को मजबूर हैं।