
बदायूं। किसान औषधीय उपयोग वाले मैंथा की फसल तो बड़े पैमाने पर कर ही रहे है। अब खेती में कुछ बदलाव भी लाएं। यह समय की मांग भी है। ईसबगोल का नाम तो सभी ने सुना होगा। इसकी व्यावसायिक खेती करके काफी लाभ कमाया जा सकता है। इसमें लागत भी कुछ ज्यादा नहीं आती है। फिर इसे कम सिंचाई वाले क्षेत्रों में भी आसानी से किया जा सकता है।
ईसबगोल का उपयोग पेचिश, दस्त, कब्ज, कफ, पित्त नाशक, रक्त विकार, उदरसूल में उपयोग किया जाता है। इसके बीजों का ही प्रयोग औषधि में होता है। यही नहीं ईसबगोल के बीजों का उपयोग कई प्रसाधनों और आइसक्रीम उद्योग व चाकलेट निर्माण में भी होता है। ईसबगोल की भूसी में म्यूसीलेज होता है, जिसमें ऐसीविचेज एवं ग्लेक्ट्रोनिक एसिड होती है। बीजों में 17-19 प्रतिशत प्रोटीन तथा पीला तेल पाया जाता है। तेल में सीरम कोलेस्ट्राल कम करने की क्षमता होती है। इसका उत्पादन अन्य फसलों की तुलना में आसान है। इसकी उपज के लिए रेतीली दोमट मिट्टी जिसमें पानी न रुकता हो, बहुत उपयुक्त होती है।
ईसबगोल की फसल को ज्यादा उर्वरक की भी आवश्यकता नहीं होती है। अच्छी फसल के लिए 25 किलो नगजन, 25 किलो फास्फोरस प्रति हेक्टेयर की जरूरत होती है। भूमि की उर्वरता के अनुसार ईसबगोल के बीज का उत्पादन 500 से 1000 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर प्राप्त किया जा सकता है। इसका बीज 10 से 15 किलो प्रति हेक्टेयर की मात्रा में बोया जाता है। फसल के पकने और पूरी तरह तैयार होने में तीन माह का समय लगता है। फूल जब लाल रंग के हो जाते है तो जमीन से 15 सेमी ऊपर से हंसिये से काटा जाता है।
डीएचओ कौशल कुमार नीरज ने बताया है कि बीजों से जुड़ी बीमारियों की रोकथाम के लिए टीएम टीडी ट्रेटा मीथोलथ्रिम डाई सल्फाइड 3 ग्राम मात्रा 1 किलो ग्राम बीज के हिसाब से उपचारित करना ठीक रहता है। फसल को 4-5 सिंचाई की जरूरत होती है। गुजरात ईसबगोल 1-2, 5 प्रजाति उत्पादन की दृष्टि से अच्छी है। उन्होंने बताया कि बुवाई के बाद बीजों को झाडू़ की सहायता से मिट्टी में मिला देते है। बीज बोने और पहली सिंचाई के 4-5 दिन के अंदर अंकुरण हो जाता है।
ईसबगोल के बीज का सबसे महत्वपूर्ण औधषीय उपयोग बीज के पतले छिलके, जिसे सामान्य भाषा में भूसी कहा जाता है से प्राप्त होता है। एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में ईसबगोल की फसल करने पर करीब 21 हजार रुपये लागत आती है। इसकी फसल से प्राप्त होने वाले बीजों से करीब 63 हजार रुपये मिलते है। इस तरह 42 हजार रुपये तक का मुनाफा मिल जाता है।