
बदायूं। प्याज की खेती में यदि थोड़ी सावधानी बरती जाये और देखभाल करे तो इससे काफी लाभ कमाया जा सकता है। समय में पौध की रोपाई करने से अच्छा उत्पादन मिलता है।
प्याज की कीमतें हर साल बढ़ती है। इस साल भी पखबाड़े भर पहले आठ-दस रुपये प्रति किलो बिकने वाला प्याज अब बीस रुपये किलो तक पहुंच गया है। प्याज की पौध की रोपाई समय पर करने से निश्चित ही उत्पादन बढ़ता है। 45-60 दिन की पौध की रोपाई खेतों में कर देना चाहिए। मौजूदा समय रोपाई के लिए उपयुक्त है। पौध लगाने के लिए रबी में काफी समय मिल जाता है। अन्य फसलों से खेत खाली होते ही रोपाई करते है। यदि प्याज की फसल आलू, या गोभी के बाद ली जा रही है तो अतिरिक्त उर्वरकों की आवश्यकता बहुत कम पड़ती है। एक हेक्टेयर में 200 कुन्तल गोबर की खाद 100-120 किलो ग्राम नत्रजन, 60-80 किलो फास्फोरस और 80 किलो पोटाश की आवश्यकता होती है।
डीएचओ कौशल कुमार नीरज ने बताया है कि नत्रजन की आधी मात्रा तथा फास्फोरस और पोटाश की पूरी मात्रा पौध रोपाई के पूर्व ही खेतों में डाल देते है। शेष नत्रजन की मात्रा दो बार में एक बार रोपाई के 25-30 दिन के बाद तथा पुन: 45-50 दिन के बाद छिड़काव करना चाहिए। आरंभ में सिंचाई 10-15 दिन के अन्तर पर तथा फरवरी माह के बाद 8-10 दिन के अन्तर पर करना आवश्यक है। फसल में खरपतवार को नष्ट करने के लिए निराई, गुड़ाई अवश्य करे।
उन्होंने कहा कि प्याज की खुदाई के 15 दिन पहले मेलिक हाईड्राजाइड 2.5 प्रतिशत घोल का छिड़काव करें। 2.5 ग्राम दवा को एक लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करे। उन्होंने कहा है कि पौध की रोपाई विलम्ब होने पर पैदावार कम हो जाती है। फसल में बीमारियों की रोकथाम के लिए नर्सरी उगाने की जगह बदलते रहे। स्वस्थ बीज का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पौध की जड़ों के पास जमीन की सतह पर थीरम या हार्बोडाजिम (1.9 ग्राम) या मैकोजेब (2.5 ग्राम) को प्रति लीटर पानी में 15 दिन के अन्तर पर छिड़काव करना चाहिए। उन्होंने कहा है कि किसी तरह की खेती में समस्या आने पर किसान कलेक्ट्रेट परिसर स्थित कार्यालय में सम्पर्क कर सकते है। किसानों की समस्याओं का हरसंभव निदान किया जायेगा।