
मथुरा। गन्ने की बुवाई का समय चल रहा है। किसान गन्ने की खेती के साथ-साथ अन्त: फसल लेकर अधिक लाभ कमा सकते हैं। इसके किसान शरद और बंसत कालीन ऐसी फसलों का चयन करें, जिनका गन्ने की फसल पर विपरीत प्रभाव न पड़े।
यह कहना है कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. संतोष कुमार मिश्रा का। श्री मिश्रा कृषि संभागीय परीक्षण एवं प्रदर्शन केंद्र राया पर चल रहे आगरा और अलीगढ़ मंडल के किसान विद्यालयों के किसान मास्टर ट्रेनरों के प्रशिक्षण के 11 वें दिन शुक्रवार को गन्ना की वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण दे रहे थे। उन्होंने किसान मास्टर ट्रेनरों को बताया कि यह समय गन्ना की बुवाई का है। किसान पचास से साठ क्िवटल प्रति हेक्टेयर बीज तीन गांठ वाला डाले। बीज के लिए गन्ने को तेज धारदार हथियार से ऐसा काटे कि गन्ना फट न सके। उन्होंने किसानों को उन्नतशील प्रजातियों की भी जानकारी देने के साथ बुवाई के दौरान संतुलित उर्वरकों का प्रयोग भी बताया। श्री मिश्रा ने कहा कि गन्ना की खेती के साथ-साथ अन्त: फसलों में शरद कालीन मटर, आलू, लाही, राई, प्याज, मसूर, धनिया, लहसुन, मूली, गोभी, शलजम और बंसत कालीन उड़द, मूंग, भिण्डी, लोबिया की खेती करके किसान अधिक लाभ कमा सकते हैं।
उन्होंने चारे की समस्या से छुटकारा पाने के उपाय किसानों को बताते हुए कहा कि पशुओं को हरा चारा मिलने से उनका स्वास्थ्य ठीक रहता है। इसके लिए किसान जई, मल्टीकट और देशी ज्वार, मक्का और लोबिया उगा सकते हैं। इससे पूर्व वेटेनरी के अधिष्ठाता एसडी शर्मा ने पशु प्रबंधन की जानकारी किसान मास्टर ट्रेनरों को दी। उन्होंने संतुलित मात्रा में पशुओं को आहार दिए जाने के साथ-साथ प्रसव काल के दौरान बरती जाने वाले सावधानियों से भी किसानों को अवगत कराया। सेवानिवृत्त भूमि संरक्षण अधिकारी गिर्राज प्रसाद वशिष्ठ ने किसान मास्टर ट्रेनरों को जल प्रबंधन की जानकारी देते हुए बताया कि भूगर्भ जल स्तर को बढ़ाने के लिए किसान मेड़बंदी के साथ-साथ चैकडेम, कंटूर बांध बनाएं। उन्होंने खेतों की सिंचाई में पानी की बचत के लिए किसानों को क्यारियां बना कर सिंचाई करने की सलाह दी। भूमि कटाव को रोकने के उपाय भी उन्होंने बताए।