
मुजफ्फरनगर। लगभग दस वर्ष से पुरकाजी के जंगल में पिंजरे में कैद अफ्रिकन बब्बर शेर नरसिम्हा को आखिरकार आजादी नसीब हो ही गई। पशुओं के हित से जुड़े अंतर्राष्ट्रीय संगठन की पहल पर यह कार्रवाई हुई है और डीएम और एसएसपी ने प्रशासनिक अमले के साथ मौके पर जाकर शेर को पिंजरे से मुक्त कराते हुए उसे वन विभाग के हवाले कर दिया है। शेर को जयपुर स्थित रेस्क्यू सेंटर भेजे जाने की तैयारी चल रही है। उधर, शेर के पालनकर्ता ने प्रशासन पर जबरदस्ती करने का आरोप लगाते हुए कोर्ट में जाने की चेतावनी दी है। एसएसपी का कहना है कि कई पहलुओं से इस मामले की जांच की जा रही है और संभव है कि शेर के कथित मालिक के खिलाफ आपराधिक मामला भी दर्ज हो।
गुरुवार की दोपहर अंतर्राष्ट्रीय पशु रक्षा अधिकार संस्था के भारतीय प्रतिनिधि नरेश कादियान दिल्ली से मुजफ्फरनगर पहुंचे और एसएसपी विजय प्रकाश और जिलाधिकारी अमृत अभिजात से मिलकर भूजाहेड़ी में बंधक बनाकर रखे गये शेर की जानकारी दी। नरेश कादियान का यह भी आरोप था कि शेर को अवैध रूप से पिंजरे में बंद रखा गया और उसके साथ बेहद अमानवीय बर्ताव किया जा रहा है। नरेश कादियान ने पेटा कानून का हवाला देते हुए कार्रवाई की मांग की। नरेश की शिकायत को दोनों अदिकारियों ने बेहद गंभीरता से लिया और वन अधिकारी राजीव अस्थाना और एसडीएम सदर व फोर्स के साथ तत्काल मौके पर पहुंच गये। अधिकारियों के आदेश पर शेर के मालिक राजीव गुप्ता को बुलाया गया। राजीव गुप्ता ने हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए शेर को अपनी वैध मिल्कियत साबित करने का प्रयास किया, परंतु अधिकारियों ने इसे अपर्याप्त बताते हुए शेर को को वन अधिकारी की देख रेख में सौंप दिया। शेर को पशु रक्षा अधिकार संस्था की मदद से जयपुर स्थित रेस्क्यू सेंटर भेजने की तैयारी चल रही है। एसएसपी विजय प्रकाश ने बताया कि राजीव गुप्ता के दावों की वन अधिकारियों द्वारा जांच पड़ताल की जा रही है। हाई कोर्ट के स्टे आर्डर भी अध्ययन किया जा रहा है। अब तक की जांच से यह साफ हो गया है कि राजीव गुप्ता ने नियम विरुद्ध ढंग से काम किया है। उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज होगा।