
हरदोई। महागौरी भक्त की मनचाही मांग पूरी करतीं है। उनका अष्टमी को पूजन किया गया।
श्रवण देवी मंदिर में सुबह से भक्तों का पहुंचना शुरू हो गया। मंदिर के पुजारी राम विलास तिवारी बताते है कि राजा दक्ष के महाया में दक्ष सुता ने आत्माहुति दी थी। इससे शंकर क्रोधित हुए और दक्ष कन्या का शव लेकर तांड़व करने लगे और महायज्ञ का विध्वंस किया। उस समय भगवती का श्रवण तंत्र यानी कान इस स्थान पर गिरा। इस कारण इस स्थान को श्रवण देवी पीठ कहा गया। जनश्रुति के अनुसार दक्ष कन्या का हृदय प्रदेश नैमिषारण्य के ललिता देवी स्थान पर गिरा। उसे भी प्रमुख शक्ति पीठ कहा गया। दक्ष सुता अगले जन्म राजा हिमाचल के घर पैदा हुई। वह भगवान शंभु को पति रूप में प्राप्त करना चाहती थी। इस प्रयास में वह तपस्या करते-करते काली हो गयीं। तब शंभु ने उनको साफ सुथरा रूप दिया। इसके बाद वह मोती की माला के समान श्वेत हो गयीं। इस कारण उनको महा गौरी कहा गया। उनके पूजन से अविवाहित बालिकाओं को मनचाहा वर प्राप्त होता है। बाबा नागेश्वर नाथ मंदिर, दुर्गा मंदिर, सिद्धनाथ मंदिर, काली मंदिर में भक्तों की भीड़ रही। नुमाइश चौराहा के शिव भोले मंदिर में भी देवी की शाम की शयन आरती में भी भक्त पहुंचे।