गदरपुर, जागरण कार्यालय: श्री हरिकथा मर्मज्ञ पं. जुगल किशोर शास्त्री ने हनुमान जी के चरित्र का वर्णन किया। शुक्रवार को पं. युगल शास्त्री ने श्री सनातन धर्म मंदिर के 33वें वार्षिकोत्सव एवं बसंत पंचमी के पावन पर्व पर आयोजित हरिकथा एवं सत्संग के तीसरे दिन कहा कि हनुमान जी प्रभु श्रीराम जी को अत्यधिक प्रिय थे। उन्होंने बताया कि हनुमान जी की प्रशंसा करते हुए श्रीराम जी ने स्वयं कहा, 'रघुपति कीन्ही बहुत बढ़ाई तुम मम प्रिय भरत ही सम भाई' कि तुम मुझे भरत के समान प्रिय हो, क्योंकि भरत नरसेवी हैं। इसलिए जो नर सेवा करते हैं भगवान उन्हें प्राणों से अधिक प्रेम करते हैं। दूसरी ओर लक्ष्मण की तुलना करते हुए हनुमान जी को अधिक प्रिय बताते हुए कहते हैं कि 'सुन कपि जिस मानस ते उना, तुम मम प्रिय लक्ष्मण ते दूना' यानि तुम मुझे लक्ष्मण से भी अधिक प्रिय हो। इस दौरान अध्यक्ष हरिचन्द छाबड़ा ने बताया कि शनिवार को नव मंदिर निर्माण को भूमि पूजन प्रात: नौ बजे पं. विजय शास्त्री करेंगे। 10 बजे सत्संग एवं प्रवचन होगा उसके उपरांत दोपहर 12 बजे अटूट लंगर भी होगा। इस दौरान राजकुमार भुड्डी, अशाके भुड्डी, कृष्णल लाल बत्रा, अजय खेड़ा, शकुन्तला खेड़ा, सत्या सुखीजा, संतोष सुखीजा, सुनीता बजाज आदि थे।