= स्थानीय मुद्दों का निराकरण मतदाताओं के लिए अहम
सितारगंज, जागरण संवाददाता: विधानसभा चुनाव में सितारगंज सीट पर इस बार स्थानीय मुद्दे हावी है। सभी प्रत्याशी मतदाताओं को लुभाने के लिए रात-दिन एक किये हुये हैं। इसके बावजूद मतदाताओं की खामोशी नहीं टूट रही। इससे प्रत्याशियों की बेचैनी बढ़ रही है। इससे यह भी पता नहीं चल रहा कि ऊंट किस करवट बैठेगा।
इस सीट पर 13 प्रत्याशियों ने नामांकन कराया था। जिनमें से निर्दलीय उमेश कुमार का नामांकन पत्र खारिज हो गया था व अफसर अली ने नाम वापस ले लिया था। इसके बाद इस सीट पर 11 प्रत्याशी मैदान में रह गये थे। यहां 91247 मतदाता हैं। जिनमें 48800 पुरुष व 42447 महिला मतदाता शामिल हैं। महिला मतदाताओं की संख्या भी काफी होने से उनकी चुनाव में खासी भूमिका रहेगी। सभी प्रत्याशी जोर-शोर से चुनाव प्रचार व जनसंपर्क कर रहे हैं। मतदाताओं को लुभाने के लिए तमाम वादे किये जा रहे हैं।
यहां एक तरफ दस साल से विधायक रहे बसपा प्रत्याशी नारायण पाल चुनाव लड़ रहे हैं, तो कांग्रेस ने जिला पंचायत अध्यक्ष सुशीला गंगवार के पुत्र सुरेश गंगवार को मैदान में उतारा है। भाजपा ने बंगाली मतदाताओं की संख्या को देखते हुये किरन चंद्र मंडल पर दांव आजमाया है। सपा ने भी इसी समीकरण को ध्यान में रख विनय कृष्ण मंडल को प्रत्याशी बनाया। पूर्व पालिकाध्यक्ष अनवार अहमद निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे है। उनकी पत्नी वर्तमान में पालिकाध्यक्ष हैं। इस सबके चलते यहां मुकाबला रोचक होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। यहां मतदाता फिलहाल राष्ट्रीय व प्रदेश स्तरीय से ज्यादा स्थानीय मुद्दों को तरजीह दे रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील इस क्षेत्र में इससे बचाव की ठोस योजनाएं बनाने, उद्योगों में स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार, शक्तिफार्म क्षेत्र में भू आवंटियों को भूमिधरी अधिकार, बस स्टेशन, डिग्री कालेज, आइटीआइ की स्थापना, बैगुल जलाशय के डूब क्षेत्रों में बसे गावों की भूमि को राजस्व अभिलेखों में दर्ज करना शामिल हैं। प्रत्याशी भी मतदाताओं की नब्ज भांप इन्हीं समस्याओं के समाधान के नाम पर वोट मांगने में लगे हैं। मतदाता भी इस बार प्रत्याशियों को खासा छकाने के मूड में हैं। उसने अभी तक पत्ते नहीं खोले हैं।