
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। निठारी कांड के मुख्य अभियुक्त मोनिंदर सिंह पंधेर के घर काम करने वाली नौकरानी माया सरकार को अदालत में पेश करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से सुप्रीमकोर्ट ने इनकार कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निचली अदालत या हाईकोर्ट में इस बाबत याचिका दाखिल करने को कहा है।
निठारी कांड पीड़ित अनिल हलधर ने सुप्रीमकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल कर माया सरकार को अदालत में पेश करने का आदेश मांगा था। इस कांड में अनिल की बेटी की भी दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी।
न्यायमूर्ति बीएन अग्रवाल की अध्यक्षता वाली पीठ ने अनिल हलधर के वकील बीपी सिंह ढाकरे तथा डीके शर्मा की याचिका पर सुनवाई की सभी दलीलें ठुकराते हुए कहा कि याचिकाकर्ता इस बाबत उचित अदालत में जाएं। ट्रायल कोर्ट में अर्जी दाखिल करें या हाईकोर्ट जाएं। याचिका में कहा गया था कि निठारी कांड की घटनाओं के समय माया सरकार पंधेर की कोठी में घरेलू कामकाज करती थी।
नोएडा पुलिस ने घटना का खुलासा होने के बाद दिसंबर 2006 में माया सरकार को गिरफ्तार किया था और बाद में उसे सीबीआई को भी सौंपा था। आरोप के मुताबिक माया ही बच्चों को फुसला कर पंधेर की कोठी तक लाती थी।
याचिकाकर्ता का कहना है कि निठारी कांड में सीबीआई 13 आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। लेकिन एक भी मामले में माया सरकार को न तो गवाह बनाया गया है और न ही अभियुक्त। यह मामले की मुख्य कड़ी है।