क्लीनिक नहीं चली तो बन गया सीरियल किलर

 
May 15, 02:26 pm

गुड़गांव [संजय यादव]। आंखों पर नजर का चश्मा और अच्छे कपड़े पहनने वाले करीब 48 वर्षीय डा. देवेंद्र शर्मा उर्फ 'डाक्टर डेथ' को देखकर कोई अंदाजा नहीं लगा सकता कि उसका असली चेहरा कितना खूंखार है। वर्ष 2001 में क्लीनिक नहीं चलने पर बीएएमएस डाक्टर से हैवान बनकर अपराध की दुनिया में उतरा यह डाक्टर अब तक 21 से अधिक टैक्सी चालकों को अपने गिरोह के सदस्यों की मदद से मौत के घाट उतार चुका है। ताज्जुब तो इस बात की है कि बुधवार को अदालत द्वारा सुनाए गए सजा-ए- मौत के फैसले के बाद भी डा. शर्मा के चेहरे पर कोई शिकन तक नहीं थी।

पुलिस रिकार्ड के मुताबिक सूट-बूट पहनकर टैक्सी चालकों को किराये पर ले जाकर अपने जाल में फांसने वाला अलीगढ़ के पुरैना गांव का डा. देवेंद्र शर्मा पहले अलीगढ़ के समीप के एक कस्बे में अपना 'जनता क्लीनिक' चलाता था। पुलिस की पूछताछ में हुए खुलासे को सच मानें तो डाक्टर डेथ का कहना है कि डाक्टरी के धंधे में हुए घाटे के कारण उसने अपराध जगत में कदम रखा था। अपराध करने के तरीके की बात करें तो उसका कहना है कि वह टैक्सी चालक को फंसाकर सीधा अलीगढ़ के समीप स्थित हजारा नहर पर ले जाता था। जहां पहले से ही उसके गिरोह के सदस्य पूरी तैयारी के साथ उसका इंतजार कर रहे होते थे। वहां टैक्सी चालक को गाड़ी से उतारकर नहर के किनारे उसकी रस्सी या गमछे से गला घोंटकर हत्या करते। बाद में उसके कपड़े या अन्य सामान सहित उसकी लाश को नहर में फेंक देते और उसकी गाड़ी को मॉडल के अनुरूप कीमत तय कर बेच देते थे।

हालांकि हैवानियत का दूसरा नाम सीरियल किलर डा. देवेंद्र शर्मा ने हर टैक्सी चालक को अपने सामने दम तोड़ते देखा, लेकिन उसका कहना है कि वह स्वयं उन्हें नहीं मारता था। लेकिन दो अक्टूबर, 2004 को पुलिस रिमांड के दौरान उसने अपना जुर्म कबूलते हुए यह कहा था कि उसका काम केवल चालक को हजारा नहर तक पहुंचाने का था। बाकी काम उसके गिरोह के साथी करते थे। वह तो वहा से गाड़ी के मॉडल के आधार पर पचास हजार से एक लाख रुपये लेकर अपने अगले शिकार की तलाश में निकल लेता था।

एजेंसियों की मार्फत भी लेता था किराये पर टैक्सी

सीरियल किलर डा. शर्मा बहुत समझदारी से अपना शिकार फंसाता था। छोटे-छोटे टैक्सी स्टैंड पर वह एकाएक पहुंचता या फिर वह सीधे ट्रैवल एजेंसियों के मार्फत ही गाड़ी बुक कराया करता। इन एजेंसियों से गाड़ी बुक कराते समय उसकी यही डिमांड होती कि गाड़ी एकदम नई व बेहतर कंडीशन में होनी चाहिए।




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