फरीदाबाद, जागरण संवाददाता। 'अपनी गलती का मुझे एहसास है और मुझे पछतावा भी हो रहा है। यही मेरा प्रायश्चित है कि अब मैं दिन में छह घंटे बादशाह खान अस्पताल के वार्डो में झाडू़ू-पोछा लगाता रहूं।' यह कहना है चार नंबर आदर्श कालोनी निवासी राजपाल का, जिसने नाबालिग से दुष्कर्म का प्रयास किया था। अदालत ने दोषी राजपाल को छह माह तक बादशाह खान अस्पताल में सफाई कर्मी के रूप में काम करने की सजा सुनाई है। अस्पताल में सफाई कर रहा राजपाल आजकल चर्चा का विषय बना हुआ है।
अस्पताल की सफाई कर रहे राजपाल ने बताया कि अदालत ने उसे जेल जाने के बजाय अस्पताल में सफाई करने का जो आदेश दिए हैं, वह उसके लिए बेहतर है। उसे अपने किए का पछतावा है। उसे उसके किए की सही सजा मिली है। अब वह बादशाह खान अस्पताल की गंदगी साफ कर पापों का प्रायश्चित कर रहा है। वह प्रतिदिन सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक वार्डो की सफाई करता है।
ज्ञात हो कि 12 जून 1999 को आदर्श कालोनी निवासी एक व्यक्ति ने पुलिस में मामला दर्ज कराया था कि 11 जून की रात वह परिवार सहित घर में टीवी देख रहा था, तभी बिजली चली गई। इस पर सभी लोग आंगन में आ गए। उसकी नौ साल की बेटी भी घर के बाहर चली गई। जब लाइट आई तो उसकी बेटी वहां से गायब थी। उन्होंने उसकी तलाश शुरू की तो पास के वर्कशाप से उसके चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। जब वे लोग वहां पहुंचे तो वहां काम करने वाला राजपाल उन्हे देखकर भाग गया।
थाना एनआईटी पुलिस ने राजपाल के खिलाफ दुष्कर्म के प्रयास का मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। राजपाल की उम्र उस समय 16 साल थी, इस वजह से उसे बाल अदालत में पेश किया गया। पिछले सप्ताह पूर्व सीजेएम विमल कुमार सपरा ने इस मामले में आरोपी राजपाल को दोषी मानते हुए छह माह तक बादशाह खान अस्पताल में बतौर सफाईकर्मी काम करने की सजा सुनाई।
इस मामले में सीएमओ डा. रविंद्र माथुर ने बताया कि अदालत ने ऐसी सजा सुनाकर राजपाल को मौका दिया है कि वह आगे बेहतर जीवन जिए।