सुप्रीमकोर्ट से मौत की सजा बरकरार

 
Jul 24, 10:07 pm

नई दिल्ली। पांच साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या करने वाले की फांसी की सजा पर सुप्रीमकोर्ट ने अपनी मुहर लगा दी है।

न्यायमूर्ति अरिजीत पसायत व न्यायमूर्ति मुकुंदकम शर्मा की पीठ ने अभियुक्त बंटू की मौत की सजा बरकरार रखते हुए कहा कि उसका अपराध जघन्यतम अपराध की श्रेणी में आता है। उसने पांच साल की बच्ची से दुष्कर्म के बाद बड़े ही क्रूर तरीके से उसकी हत्या कर दी ताकि उसका अपराध पकड़ा ना जाए और बच्ची की मौत एक दुर्घटना लगे।

यह मामला आगरा का है। जहां वर्ष 2003 में बंटू ने देवी जागरण में गई बांसी खुर्द गांव की अपने ही पड़ोसी की बच्ची को दूर खेत में ले जाकर दुष्कर्म किया। उसके बाद उसके संवेदी अंगों में लकड़ी घुसेड़ कर उसकी हत्या कर दी ताकि बच्ची की मौत दुर्घटना लगे। इसी दौरान बच्ची को ढूंढने निकले गांव वालों ने बंटू को हत्या करते समय रंगे हाथ पकड़ा था। निचली अदालत ने इस मामले में बंटू को फांसी की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने भी फांसी को सही ठहराया था। बंटू ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए सुप्रीमकोर्ट में अपील की थी, लेकिन सुप्रीमकोर्ट ने भी सजा पर अपनी मुहर लगा दी है।




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