भुवनेश्वर। उड़ीसा के कंधमाल में हाल में हुई हिंसा के पीछे मुख्य कारण क्या धर्म परिवर्तन था राज्य सरकार इस मुद्दे पर जहां चुप है वही विरोधाभासी बातें सामने आ रही हैं।
मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के अनुसार कंधमाल हिंसा आदिवासियों और गैर आदिवासियों के बीच संशय एवं क्रोध का परिणाम था। उनका यह भी कहना है कि कंधमाल में खराब स्थिति के पीछे नक्सलियों की गतिविधियां भी जिम्मेदार रहीं। दूसरी ओर, ईसाई नेताओं का कहना है कि किसी का भी बलात धर्म परिवर्तन कराना ईसाईयत के खिलाफ है, जबकि हिंदू समूहों का दावा है कि राज्य में बड़ी संख्या में लोगों का धर्म परिवर्तन कराने के लिए प्रलोभन और जोर जबर्दस्ती की नीति अपनाई गई।
इसाईयों के इस तरह की घटना में शामिल नहीं होने पर जोर देते हुए बिशप हाउस के जोसेफ कलाथिल ने बलात धर्म परिवर्तन की एक भी घटना बताने को कहा। एक प्रमुख ईसाई नेता रेव प्रदीप दास भी इस बात से सहमत नहीं हैं कि राज्य में जबर्दस्ती धर्म परिवर्तन हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि धर्म परिवर्तन को मैं एक आदमी में बदलाव के तौर पर देखता हूं। यह तभी संभव हो सकता है जब मनुष्य का हृदय परिवर्तित हो और यह सिर्फ भगवान ही कर सकता है।
हिंदू जागरण समुख्य [एचजेएस] के राज्य अध्यक्ष अशोक साहू इन कारणों से सहमत नहीं हैं। सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी साहू ने कहा कि कंधमाल की जनसंख्या के आंकड़े जिले में अवैध धर्म परिवर्तन की पुष्टि करते हैं।
2001 की जनसंख्या के आंकड़ों को उद्धृत करते हुए साहू कहते हैं कि कंधमाल में 1961 में ईसाइयों की संख्या महज 19,128 थी जो 2001 में बढ़कर एक लाख 17 हजार 950 हो गई। लेकिन उड़ीसा धर्म स्वतंत्रता विधेयक [ओएफआरए]1967 के अनुसार धर्म परिवर्तन के लिए सिर्फ दो लोगों ने कंधमाल के जिलाधिकारी के पास आवेदन दिया।
मिशनरियों पर अवैध धर्म परिवर्तन का आरोप लगाते हुए एचजेएस नेता ने दावा किया दो लोगों को छोड़कर बाकी एक लाख 17 हजार 948 लोगों का धर्म परिवर्तन ओएफआरए के तहत अवैध है।
कलाथिल ने हालांकि इसको चुनौती देते हुए कहा कि अगर उड़ीसा में अवैध धर्म परिवर्तन हो रहा है तो उड़ीसा के करीब 500 थानों में क्या एक भी मामला दर्ज किया गया है? उन्होंने कहा कि वह भी क्रांतिकारी लेखक पी वारा वारा राव के तर्क से सहमत हैं।
राव के अनुसार जाति प्रथा के कारण बड़ी संख्या में प्रताड़ना के शिकार दलितों ने प्रतिष्ठित जिंदगी जीने के लिए ईसाई धर्म को स्वीकार किया। विहिप के राज्य महासचिव गौरी प्रसाद रथ इस बात से असहमत हैं। रथ कहते हैं कि जाति प्रथा धर्म परिवर्तन का एक बहाना मात्र है। अगर जाति प्रथा इसका कारण होता तो दूसरे जिलों के लोग भी ईसाई धर्म अपनाते। उन्होंने आरोप लगाया कि मिशनरी दलितों और आदिवासियों की सादगी कम साक्षरता और गरीबी का फायदा उठाकर धर्म परिवर्तन कराती हैं। इसका प्रमाण उन्होंने पिछले 40 सालों में कंधमाल गजपति सुंदरगढ़ और कोरापुट जिलों में ईसाई जनसंख्या में वृद्धि होना बताया।
कटक भुवनेश्वर ईसाई धर्म के आर्क बिशप रेव राफेल चिनाथ ने दावा किया कि लोग खुद से ईसाई धर्म को गले लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी धर्म परिवर्तन नहीं करा रहा। यह लोगों की इच्छा है कि वह किस धर्म में रहना चाहते हैं। साहू ने कहा कि उड़ीसा में 42 फीसदी लोग गरीबी रेखा से नीचे की जिंदगी जीते हैं और कंधमाल में यह 75 फीसदी है। उन्होंने कहा कि मिशनरी प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने के लिए इसे उपयुक्त जगह मानते हैं।
संघ परिवार के समर्थकों का कहना है कि दिवंगत विहिप नेता लक्ष्मणानंद सरस्वती कंधमाल में धर्म परिवर्तन के खिलाफ थे। बजरंग दल के राष्ट्रीय समन्वयक सुहास चौहान ने कहा कि इसलिए बाधा को समाप्त करने के लिए स्वामी जी की हत्या कर दी गई।