
नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र ने भारतीय नौसेना को सोमालिया के जल क्षेत्र में जाकर जल दस्युओं को ठिकाने लगाने की अनुमति दे दी है।
नौसेना के सूत्रों ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि को प्रस्ताव संख्या 1838 के हवाले से स्पष्ट किया गया है कि कुछ अन्य नौसेनाओं की तरह भारतीय नौसेना भी सोमालियाई जल क्षेत्र में घुसकर जल दस्युओं के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है।
नौसेना और विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि अरब सागर में तैनाती के समय भारत अन्य देशों की नौसेनाओं के साथ अनौपचारिक तौर पर सहयोग कर रहा है। सूत्रों के अनुसार हिंद महासागरीय ताकतों के साथ भारतीय नौसेना तालमेल कायम कर रही है और नाटो देशों के जंगी पोतों के साथ भी अनौपचारिक समन्वय कायम किया गया है। अलबत्ता सूत्रों ने साफ कहा कि भारत किसी भी कीमत वहां सक्रिय तीनों में से किसी भी गठबंधन के बैनर तले नहीं खड़ा होगा। वह सिर्फ संयुक्त राष्ट्र के तहत ही काम करने को तैयार है।
इस बीच सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया कि अदन खाड़ी में भारतीय नौसेना दो जंगी पोत तैनात नहीं कर रही है, बल्कि उसका विध्वंसक जंगी पोत आईएनए मैसूर इस समय वहां गश्त कर रहे आईएनएस तबर का स्थान लेगा। दिल्ली क्लास का विध्वंसक जंगी पोत आईएनएस मैसूर मौजूदा पोत से कहीं अधिक ताकतवर है। सूत्रों ने कहा कि सोमालियाई सरकार ने पिछले महीने ही संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि जल दस्युओं से निपटने का मार्ग प्रशस्त किया जाए। इस अनुरोध पर संयुक्त राष्ट्र ने गत 8 अक्टूबर को प्रस्ताव 1838 पारित किया। इससे पहले संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव 1814 तथा 1816 इस बारे में पहले से लागू थे।
इसी बीच, अदन की खाड़ी में समुद्री लुटेरों के खिलाफ भारतीय नौसेना की कार्रवाई से प्रभावित अंतरराष्ट्रीय नौवहन एजेंसी के एक शीर्ष अधिकारी ने भारत की तर्ज पर अफ्रीकी जल क्षेत्र में मौजूद सभी विदेशी नौसेनाओं के संदिग्ध जहाजों को रोककर उनकी तलाशी लेने की पैरवी करते हुए कहा कि इससे डकैतों के अभियान को नाकाम करने में मदद मिल सकेगी।