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मुठभेड़ मामले में घिरे एसएसपी बचाव में उतरे

Jul 05, 03:05 am
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देहरादून, जागरण संवाददाता। कथित मुठभेड़ के मामले में चौतरफा सवालों में घिरे एसएसपी अमित कुमार सिन्हा देर शाम पत्रकारों से मुखातिब हुए। उन्होंने मुठभेड़ को सही ठहराया और रणवीर को दरोगा पर जानलेवा हमला व पिस्टल लूट का आरोपी बताया।

एसएसपी ने कहा कि जब रणवीर और उसके दो साथी दरोगा पर हमला व पिस्टल लूटकर फरार हुए तभी पुलिस ने हर ओर घेराबंदी कर दी। इस बीच पुलिस को आरोपियों के जोगीवाला रिंग रोड पर होने की सूचना मिली। पुलिस वहां पहुंची तो जंगल में छिपे आरोपियों ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में रणवीर मारा गया। उसके दो साथी गोली लगने के बाद भी फरार हो गए।

एसएसपी ने बताया कि जो बाइक रणवीर के पास मिली वह चोरी की है। बाइक पर अंकित नंबर हरियाणा के पानीपत जिले के आहिर हथरौड़ा निवासी राम मेहर की बाइक का है। पुलिस बरामद बाइक के चेसिस नंबर के आधार पर असली मालिक का पता लगा रही है।

चश्मदीदों द्वारा रणवीर को मौके से पकड़े जाने के बयान पर एसएसपी ने कहा कि घटना के समय मोहिनी रोड निवासी विधायक कुंवर प्रणव का गनर करुणेश वहां मौजूद था। उसके पास सर्विस पिस्टल थी और वह उसी रंग के कपड़े पहना हुआ था, जैसे रणवीर ने पहने हुए थे। इसलिए पुलिस उसे ही बदमाश समझकर पकड़ लाई। एसएसपी के अनुसार लोगों ने करुणेश को पुलिस की गाड़ी में बैठते हुए देखा था।

इधर, करुणेश ने बताया कि उसे चीता पुलिस ने पकड़ा था। ऐसे में सवाल यह है कि चीता पुलिस बाइक पर चलती है, जीप में नहीं। जब करुणेश को चीता पुलिस ने पकड़ा था तो जीप में वहां आई पुलिस ने किस युवक को पकड़ा था।

बयान से पलटी पुलिस

दरोगा से मारपीट के वक्त किए गए हवाई फायर पर पुलिस 24 घंटे में ही अपने बयान से पलट गई। शुक्रवार को पुलिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया था कि उस वक्त करुणेश ने हवाई फायर किए थे। पर, प्रेस वार्ता में एसएसपी इस बात से पलट गए। उन्होंने बताया कि हवाई फायर अभियंता ने किए थे। ऐसे में पुलिस एक और सवाल में घिर गई है।

कमरे का ताला तोड़ बैग ले गई थी पुलिस

मुठभेड़ मामले में नया मोड़ आ गया है। शनिवार को पता चला कि मुठभेड़ से पहले पुलिस जैन धर्मशाला गई थी। बताया जा रहा है यहां रणवीर अपने दो दोस्तों के साथ ठहरा हुआ था। पुलिस ने उसके कमरे का ताला तोड़ा और बैग व अन्य सामान साथ ले गई। ऐसे में यह सवाल अहम हो गया है कि मुठभेड़ से पहले पुलिस को कैसे पता चला कि जैन धर्मशाला में ठहरा हुआ था रणवीर।

शनिवार को जैन धर्मशाला के मैनेजर अरुण जैन ने बताया कि दो जुलाई को रणवीर अपनेदो साथी प्रदीप कुमार और अमित के साथ धर्मशाला आया। उन्हें दूसरी मंजिल पर कमरा नंबर-9 में ठहराया गया। शुक्रवार दोपहर करीब पौने दो बजे पुलिस के दो सिपाही धर्मशाला पहुंचे। वे सीधे पहली मंजिल पर गए और वहां कमरा नंबर-9 का ताला तोड़ डाला। इसके बाद वे नीचे आए। उन्होंने फोन पर सूचना दी कि सर कमरा नंबर-9 में तो कुछ नहीं है। इसके बाद दोनों सिपाही दूसरी मंजिल पर पहुंचे और कमरा नंबर-9 का ताला तोड़कर वहां रखा एक बैग साथ ले गए। अरुण के मुताबिक, इस कमरे में रणवीर ठहरा था। बैग भी उसी का था। धर्मशाला के चौकीदार भगवान सिंह ने भी इसकी पुष्टि की।

गलतफहमी में पुलिस ने जिस कमरे का ताला तोड़ा था, उसमें डा. राजेंद्र सिंह बिष्ट नाम के एक व्यक्ति रुके हुए थे। बताया जा रहा है कि बेवजह ताला तोड़ने के मामले मे डा. बिष्ट ने कोतवाली में तहरीर दी है। हालांकि पुलिस इस मामले में कुछ भी बताने से इनकार कर रही है।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि मुठभेड़ से पहले पुलिस को कैसे पता चला कि रणवीर कमरा नंबर-9 में ठहरा था। पुलिस ने वहां के अन्य कमरों की तलाशी क्यों नहीं ली।

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