औरैया। इंजीनियर मनोज गुप्त हत्याकांड के आरोपी विधायक शेखर तिवारी और उनके नौ साथियों पर दो अन्य मामलों में न्यायालय ने आरोप तय कर दिया। न्यायिक अभिरक्षा में हंगामा व फफूंद स्टेशन पर बवाल के मुकदमों में आरोप तय होने के बाद सभी को आठ अक्टूबर को साक्ष्य के लिए पुन: तलब किया गया है।
मंगलवार को आरोपी विधायक शेखर तिवारी को बाराबंकी जेल से और उनके साथी विनय तिवारी, पूती राजपूत, मनोज अवस्थी, योगेंद्र दोहरे उर्फ भाटिया, बर्खास्त गनर पान सिंह, गजराज सिंह, चालक संतोष तिवारी, देवेंद्र सिंह को लखनऊ कारागार से न्यायिक मजिस्ट्रेट विकास वर्मा की कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट में उनके विरुद्ध न्यायिक अभिरक्षा में हंगामा कर लोक सेवक को भयभीत तथा चोट पहुंचाने तथा जीआरपी फफूंद द्वारा दर्ज मुकदमे में लगाये गये चार्ज पर निर्णय होना था।
न्यायिक मजिस्ट्रेट विकास वर्मा ने दोनों मुकदमों के चार्ज पर निर्णय देते हुए अभियोजन पक्ष द्वारा लगायी गयी धाराओं को उचित माना तथा दोनों मामलों की कार्यवाही आगे बढ़ाते हुए साक्ष्य में फाइलें लगा दीं। सभी आरोपियों को 8 अक्टूबर को कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया गया, इस दिन गवाही शुरू होगी। मजिस्ट्रेट ने न्यायिक अभिरक्षा में हंगामा पर धारा 147,332, 504,506 व 7 क्रिमनल एक्ट धाराओं पर आरोप लगाया। बचाव पक्ष के वकील दीपेंद्र सिंह कुशवाह ने कहा कि वे इस आदेश के विरुद्ध जिला जज के यहां रिवीजन दायर करेंगे। न्यायिक कार्यवाही के बाद उन्हें वापस बाराबंकी जेल व अन्य आरोपियों को लखनऊ जेल भेज दिया गया। उधर सीजेएम समरपाल सिंह की कोर्ट में धारा 420 के एक अन्य मामले में शेखर तिवारी, विनय तिवारी व मनोज अवस्थी पेश हुए वहां भी उन्हें 8 अक्टूबर की अगली तारीख दी गयी।