
नई दिल्ली। अंडरवर्ल्ड डान बबलू श्रीवास्तव ने अपने ऊपर लगे महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम [मकोका] के आरोपों को चुनौती देने के लिए दिल्ली कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
निचली अदालत ने 19 सितंबर को बबलू और उसके सहयोगी फजलुर रहमान के खिलाफ यहां 1983 से 1997 के बीच सिंडीकेट चलाने के लिए मकोका के तहत आरोप तय करने की अनुमति दी थी। निचली अदालत के आदेश को बबलू ने हाईकोर्ट में यह कहते हुए चुनौती दी है कि वह पिछले 15 वर्षों से जेल में है और वह किसी अपराध में संलिप्त नहीं रहा है। श्रीवास्तव को 1995 में सिंगापुर से प्रत्यर्पित कर लाया गया था और फिलहाल वह उत्तरप्रदेश के बरेली केंद्रीय कारागार में बंद है।
न्यायमूर्ति वी. के. जैन ने उसके वकील डी. बी. गोस्वामी का तर्क सुनने के बाद दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया और अगली सुनवाई तक उन्हें जवाब दायर करने को कहा। बबलू और रहमान ने किसी अपराध सिंडिकेट में शामिल होने से इनकार किया है। दोनों पर राष्ट्रीय राजधानी में 1983 से 1997 के बीच अपराध सिंडिकेट चलाने का आरोप है। दिल्ली पुलिस ने 2006 में उनके खिलाफ मकोका के तहत मामला दर्ज किया था।
अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि श्रीवास्तव और रहमान पर दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों में हत्या, हत्या के प्रयास, उगाही के लिए अपहरण, उगाही और टाडा एवं हथियार अधिनियम के तहत कई गंभीर अपराधों में शामिल होने के मामले दर्ज हैं।
बबलू को 1995 में सिंगापुर से पांच आपराधिक मामलों में शामिल होने के आरोप में प्रत्यर्पित किया गया था। बिहार के दरभंगा जिले के रहने वाले रहमान को भारत-नेपाल सीमा पर 2006 में गिरफ्तार किया गया था और तिहाड़ जेल में वह न्यायिक हिरासत में है। पुलिस ने कहा कि रहमान अपना अपराध सिंडिकेट दुबई से चलाता था और बबलू से वह करीब 14 वर्षों से जुड़ा था।