लखनऊ। जमीयत-ए-हिंद द्वारा वंदे मातरम के खिलाफ फतवा जारी करने के मामले में स्वामी राम देव ने यहां कहा है कि करीब डेढ़ घंटे तक वह जमीयत के मंच पर थे और इस दौरान ऐसा कोई प्रस्ताव या फतवा नहीं पेश नहीं हुआ। न ही मंच से किसी ने इस संबंध में कुछ कहा। मेरे मंच पर पहुंचने तथा मेरे आने के बाद क्या हुआ मैं नहीं जानता। रही बात केन्द्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम को इस संबंध में कोई प्रस्ताव दिये जाने की तो उसकी भी मुझे कोई जानकारी नहीं है। मैं तो बस इतनी ही जानता हूं कि योग को सार्वजनिक रूप से मुस्लिम समाज ने स्वीकार कर दो मजहबों के बीच की खायी को कम किया है उसकी दरारों को भरा है। मुझे भरोसा है कि वंदे मातरम को लेकर फैलायी जा रही भ्रांतियां भी जल्दी ही दूर हो जायेंगी।
यहां एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए आये स्वामी रामदेव ने जागरण से वार्ता करते हुए यह दावा किया। उन्होंने ये भी कहा कि वंदेमातरम के विवाद में मुझे स्वाभिमान का पाठ पढ़ाने की जरूरत नहीं है मैं चौबीसों घंटे देश के स्वाभिमान की बात करता हूं और इसके लिए कार्य करता हूं। यह दावा करते हुए स्वामी रामदेव ने कहा कि देश से बड़ा कुछ भी नहीं होता, पहले सभी भारतीय हैं और बाद में हिन्दू या मुस्लिम। मुस्लिम राष्ट्रों में भी सभी लोग मातृभूमि को सलाम करते हैं। राष्ट्र को सलाम करना सभी धर्मों में बताया गया है। स्वामी रामदेव के अनुसार, हर हिन्दू गर्व और सम्मान से वंदेमातरम का उद्घोष करे, मुस्लिम भाई भी इसमें पहल करेंगे। देश में यह ऐतिहासिक घटना होगी और हिन्दू-मुस्लिम एकता का सबसे महान उदाहरण भी। यह कहते हुए उन्होंने वंदे मातरम को लेकर कहा कि वंदे मातरम किसी प्रकार की पूजा पाठ की प्रक्रिया नहीं मातृभूमि एवं जन्मभूमि के प्रति देशभक्त नागरिक का अपने वतन को सलाम है। ोड़ा के स्विस बैंकों में खाते का पता लगा