कोड़ा मामले में अब गिरफ्तारी का दौर

 
Nov 06, 03:35 pm

रांची [जागरण संवाददाता]। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के अरबों के घोटाले में अब गिरफ्तारियों को दौर शुरू हो गया है। कोड़ा पर हाथ डालने से पहले प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने उनके प्रमुख सहयोगी विनोद सिन्हा के भाई विकास सिन्हा को अपना पहला शिकार बनाते हुए शुक्रवार को दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद विकास को प्रवर्तन निदेशालय की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी कोड़ा की गिरफ्तारी के लिए तैयार बैठे हैं। उन्हें बस कोड़ा के अस्पताल से बाहर निकलने का इंतजार है। नोटिस दिए जाने के बावजूद विनोद सिन्हा व संजय चौधरी अधिकारियों के समक्ष पेश नहीं हुए। जिसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने दोनों के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी कर दिया।

विकास सिन्हा को हवाला लेन-देन और अवैध निवेश में उसकी कथित संलिप्तता के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है। विकास की गिरफ्तारी से यह तय हो गया है कि इस प्रकरण से जुड़े किसी भी व्यक्ति को आयकर विभाग व प्रवर्तन निदेशालय छोड़ने के मूड में नहीं है। प्रवर्तन निदेशालय के उप निदेशक प्रभाकांत ने विकास की गिरफ्तारी की घोषणा की। आयकर निदेशक अनुसंधान उज्जवल चौधरी ने कहा कि इस मामले में हरेंद्र सिंह, अरुण कुमार श्रीवास्तव, भीम सिंह व बसंत भट्टाचार्य से पूछताछ चल रही है। मुख्य आयकर आयुक्त शोभा रानी बसु ने भी प्रकरण में चल रहे अनुसंधान की जानकारी हासिल की।

आयकर विभाग ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के प्रमुख सहयोगी विनोद सिन्हा, संजय चौधरी, देवेंद्र मुखिया, बसंत भट्टाचार्य, मनोज पुनामिया, अनिल बस्तावडे व चार अन्य को हवाला व अवैध निवेश के मामले में पूछताछ के लिए छह नवंबर यानी शुक्रवार सुबह 11 बजे तक विभाग में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने को लेकर नोटिस जारी किया था। इनमें से सिर्फ बसंत भट्टाचार्य, कोड़ा के पीए हरेंद्र सिंह, हरेंद्र कुमार व भीम सिंह ही आयकर अधिकारियों के समक्ष उपस्थित हुए।

आयकर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि नोटिस दिए जाने के बावजूद न हाजिर होने वालों के खिलाफ विभाग कड़ी कार्रवाई करेगा। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि विभाग क्या एक्शन लेने जा रहा है। कोड़ा के सहयोगियों को देशभर के नौ शहरों के 76 स्थानों पर जारी तलाश और जब्ती अभियान के सिलसिले में अतिरिक्त आयकर निदेशक अनुसंधान के समक्ष उपस्थित होने को कहा गया था।

बहरहाल, प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग के अधिकारियों को विनोद कुमार सिन्हा और संजय चौधरी के हाजिर होने का इंतजार रहा। दोनों को शुक्रवार सुबह 11 बजे पेश होने के लिए कहा गया था। जब दोनों हाजिर नहीं हुए तो इनके खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी कर दिया गया। संजय-विनोद को आयकर विभाग के अतिरिक्त निदेशक [अन्वेषण] के समक्ष पेश होना था। इस बारे में दोनों को 2 नवंबर को ही नोटिस जारी कर दिया गया था।

कोड़ा के अस्पताल से छुट्टी में हो सकती है देरी : कोड़ा को गिरफ्तार करने के लिए प्रवर्तन निदेशालय को अभी इंतजार करना पड़ सकता है। अपोलो अस्पताल में भर्ती मधु कोड़ा इस कदर कमजोर हो चुके हैं कि उन्हें चलने-फिरने में कठिनाई हो रही है। उन्हें जल्द छुट्टी नहीं दी जा सकती है। अस्पताल के जन संपर्क अधिकारी जावेद अख्तर के अनुसार, कोड़ा की देखभाल कर रहे डाक्टरों का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री को अभी भी दर्द है। कमजोरी के कारण वह खड़ा होने में भी लाचार हैं।

जबरदस्ती कर रखा है किडनैप : विकास

रांची [जागरण ब्यूरो]। विनोद सिन्हा के भाई विकास सिन्हा ने आयकर विभाग व प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने उसे जबरदस्ती किडनैप कर रखा है। गिरफ्तारी के उपरांत कोर्ट जाने के क्रम में मीडिया से बातचीत में विकास ने कहा कि 31 अक्टूबर से ही मुझे बिना वजह किडनैप करके रखा गया है। पहले चाईबासा से मुझे रांची लाकर पूछताछ की, घर की तालाशी भी ली, पर कुछ नहीं मिला। मधु कोड़ा से संबंध के बारे में विकास से कहा कि वह हमारे क्षेत्र के हैं, लिहाजा हमसे जान पहचान होना लाजिमी हैं। विनोद सिन्हा का नाम हवाला व अवैध निवेश से जोड़े जाने के मामले में पूछे जाने पर विकास ने ऐसे किसी भी जानकारी से इन्कार किया। उसने स्पष्ट कहा कि बालाजी ग्रुप से हमारा कोई रिश्ता नहीं है। विकास के वकील अजीत कुमार ने बताया कि मेरे क्लाइंट से जबरदस्ती स्टेटमेंट लेने का प्रयास किया जा रहा है। पूछताछ के दौरान उसे एक चांटा भी मारा गया है। उससे बिना पढ़े कागजातों पर हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं।

विकास सिन्हा की झोली में डेढ़ दर्जन कंपनियां

जमशेदपुर [जागरण संवाददाता]। शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय के हत्थे चढ़नेवाले विनोद सिन्हा के भाई विकास सिन्हा ने करोड़ों रुपये का आर्थिक साम्राज्य खड़ा कर रखा है। कोड़ा के मुख्यमंत्री रहते विनोद-विकास बंधुओं की सत्ता के गलियारे में तूती बोलती थी। विकास सिन्हा का नाम पहली बार तब उछला, जब विनोद सिन्हा ने चांडिल स्थित शिवारामा स्पंज के लिए बोली लगाई। यह कंपनी संजय पलसानिया से 18 करोड़ रुपये में खरीदी गई थी। विकास सिन्हा फिलहाल इस स्पंज आयरन कंपनी का निदेशक है। इसके अतिरिक्त विनोद एंड कंपनी ने एमआर नाम से एक ही दिन 14 कंपनियों का निबंधन कराया था। एमआर नाम की बहुसंख्य कंपनियों में विकास सिन्हा बतौर निदेशक शामिल है। इनमें एमआर एलायज प्राइवेट लिमिटेड, एमआर इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड, एमआर मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड, एमआर पावर प्राइवेट लिमिटेड, एमआर टेक्नो प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड, एमआर टूरिज्म प्राइवेट लिमिटेड, एमआर वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड, एमआर ट्रांसर्पोटेशन प्राइवेट लिमिटेड आदि कंपनियां हैं। विकास ने जमशेदपुर के मानगो आशियाना सिटी में शानदार अपार्टमेंट ले रखा है। आयकर विभाग की मधु कोड़ा के 70 ठिकानों पर एक साथ हुई छापेमारी के बाद विकास फरार हो गया था। बताया जाता है कि विकास सिन्हा कागज पर लगभग डेढ़ दर्जन कंपनियों का मालिक है।




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