
नई दिल्ली। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की न्यायाधीश निर्मल यादव से संबंधित 'घर पर नकदी' मामले का शनिवार को अंत करते हुए सुप्रीम कोर्ट के निर्णायक मण्डल ने विधि मंत्रालय की यादव को दोषमुक्त करने संबंधी रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया।
इस संबंध में अटकलें हैं कि आरोपी न्यायाधीश निर्मल यादव को उत्तराखण्ड हाईकोर्ट स्थानांतरित किया जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि पिछले साल अगस्त में न्यायाधीश निर्मल यादव के घर भेजे गए 15 लाख रुपये को नाम की गलतफहमी में न्यायाधीश निर्मलजीत कौर के घर पहुंचा दिया गया था। इसके बाद यादव पर पैसे लेने के इस मामले का आरोप सामने आया। इस मामले में नाम सामने आने पर न्यायाधीश यादव को न्यायिक दायित्वों से अलग कर दिया गया था।
विधि मंत्रालय के सूत्रों ने कहा, ''हमने तत्कालीन अटॉर्नी जनरल मिलन बनर्जी की रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट के निर्णायक मण्डल को भेज दिया है।''
अटॉर्नी जनरल की रिपोर्ट के अनुसार न्यायमूर्ति यादव पर मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सुबूत नहीं हैं। गौरतलब है कि सीबीआई के निदेशक और अभियोजन निदेशक के बयानों में फर्क होने के कारण अटॉर्नी जनरल को विधि मंत्रालय को रिपोर्ट सौंपने को कहा गया था, जिसमें न्यायाधीश पर मुकदमा चलाने के पर्याप्त आधार मांगे गए थे।
इस मामले में पंजाब के राज्यपाल एस एफ रोड्रिग्ज ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर के साथ विमर्श करने के पश्चात सीबीआई जांच का सुझाव दिया था।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश के जी बालाकृष्णन ने इस मामले की सुनवाई के लिए तीन सदस्यीय न्यायाधीशों की समिति का गठन किया था। समझा जाता है कि अटॉर्नी जनरल के सुझावों को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट के निर्णायक मण्डल ने यादव पर मुकदमा न चलाने का निर्णय लिया।