
नई दिल्ली [टी. ब्रजेश]। भारत में एक और हमले की लश्कर की साजिश के खुलासे को आधार बना भारत भले ही अमेरिका को पाक में पल रहे आतंक की सच्चाई से रूबरू कराने में जुटा हो, लेकिन उसके निशाने पर मुंबई कांड का मास्टरमाइंड हाफिज मुहम्मद सईद भी है। लश्कर के एफबीआई के राडार पर आने के बाद अब भारत मान रहा है कि इस आतंकी संगठन के असली कर्ताधर्ता सईद पर शिकंजा कसने के लिए पाक को बाध्य करना पहले से कुछ आसान हो सकता है। यह इसलिए भी संभव है क्योंकि अमेरिका अपनी ही जांच एजेंसी के खुलासे को नजरअंदाज नहीं कर पाएगा और दबाव बनाने में भारत का सहयोग करेगा। ऊपर से विश्व समुदाय के सामने भी लश्कर के कारनामे एक-एक कर बाहर आ रहे हैं। भारत के खिलाफ साजिश को अंजाम देने की ताक में बैठे इस संगठन के आतंकियों का शुक्रवार को बांग्लादेश में धरा जाना इसी कड़ी में एक और अहम घटना है।
भारत मानता है कि इस तरह से लश्कर का विश्व समुदाय के बीच घिरते जाना उसके आका सईद को सांसत में डालने का सबसे अच्छा मौका है। यह तब संभव होगा जब सईद को पूरी तरह पनाह दे रहे पाक पर दबाव और बढ़ाया जाए। अमेरिका का सहयोग मिला तो भारत इस मकसद में कामयाब हो सकता है।
लश्कर से संबंध रखने वाले हेडली की गिरफ्तारी के बाद एफबीआई के हाथ लगे सुबूतों को आधार बना कर अमेरिका की आंखें खोलने में भारतीय खेमा इसी वजह से लगा हुआ है। हेडली ने भारत में एक और आतंकी हमलों की लश्कर की साजिश की जानकारी एफबीआई को दी थी।
इस खुलासे की रोशनी में भारत की कोशिश अमेरिका को यह दिखाने की है कि किस तरह इसी लश्कर का सरगना सईद पाक का मेहमान बना बैठा है और मुंबई कांड की बरसी से पहले फिर आतंक का खेल खेलना चाह रहा था। गौरतलब है कि अभी तक सईद को 26/11 का मास्टरमाइंड बताने से अमेरिका परहेज की करता रहा है। यह अमेरिका की ही नरमी की नतीजा है कि पाक सईद को मुंबई कांड का अभियुक्त तक नहीं मानता। यह तय है कि मुंबई कांड का मुख्य साजिशकर्ता भारत और पाक दोनों के लिए कूटनीतिक बाजी जीतने के लिए सबसे अहम कड़ी बन चुका है। सईद के बच निकलने से जहां भारत की पूरे मामले में कूटनीतिक हार होगी, वहीं ऐसी स्थिति में पाक दुनिया की नजरों में पूरे भारतीय अभियान को जमात प्रमुख के खिलाफ एक दुष्प्रचार साबित करना चाहेगा। यह स्वाभाविक भी है कि अगर भारत उसे ही दोषी साबित नहीं कर सका जिसे मुंबई हमले का मुख्य साजिशकर्ता बता रहा था तो फिर पूरे मामले में रह ही क्या जाता है। इस तरह की राय खुद विदेश मंत्रालय के अधिकारी ही व्यक्त करते सुने जाते हैं। यही वजह है कि पाक ने शुरू से ही सईद को बचाने की जी-जान से कोशिश की और उसके खिलाफ भारतीय साक्ष्यों का मजाक तक उड़ाया।