इंजीनियरिंग के पांच छात्र हैकिंग में गिरफ्तार

लखनऊ, जागरण संवाददाता। दूसरों के एटीएम, डेबिट व क्रेडिट कार्ड का क्लोन तैयार करते थे, खुफिया कैमरे या बूथ में खड़े होकर पिन कोड जान लेते थे, उसके बाद विभिन्न वेबसाइट के जरिए खरीदारी करते थे और मोबाइल फोन भी रीचार्ज कराते थे। एसटीएफ ने इन शातिर दिमाग हैकरों को महानगर इलाके से मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए पांचों आरोपी बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से बीटेक कर रहे हैं। इनमें से एक गुडंबा थाने में तैनात सिपाही का बेटा है। वहां के छात्रों के दो अन्य 'हैकर्स' गैंग के बारे में भी एसटीएफ को जानकारी मिली है। कानपुर पुलिस ने भी पांचों आरोपियों से लखनऊ आकर पूछताछ की है।

महोबा स्थित कृषि विभाग के वैज्ञानिक सुभाष चंद्र सिंह ने कानपुर के नवाबगंज थाने में बीते सात दिसंबर को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया कि उनके एटीएम कार्ड से 43000 रुपये की खरीदारी की गई, जबकि एटीएम उन्हीं के पास था। इसके अलावा बर्रा थाने पर भी साइबर क्राइम के ऐसे ही दो मामले दर्ज कराए गए थे। इसकी जांच एसटीएफ को सौंपी गई तो एसएसपी विजय प्रकाश ने पुलिस उपाधीक्षक त्रिवेणी सिंह को पड़ताल में लगाया। त्रिवेणी सिंह ने छानबीन की तो पता चला कि बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के छात्र गैंग बनाकर वारदात कर रहे हैं। इसके बाद एसटीएफ ने एटीएम विड्राल और ट्रांजेक्शन का ब्योरा, जिन कंपनियों से मोबाइल फोन रीचार्ज कराए गए थे उसकी जानकारी और दूरसंचार कंपनियों से डाटा मंगाकर छानबीन की। छानबीन में पता चला कि बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पांच छात्र हैकिंग कर जालसाजी कर रहे हैं। एसटीएफ का दावा है कि मंगलवार को ये लोग महानगर कोतवाली क्षेत्र में क्रेडिट व डेबिट कार्ड धारकों की तलाश में थे, तभी उन्हें दबोच लिया गया। पूछताछ में इन लोगों ने अपना नाम गुडंबा थाना परिसर निवासी शनि सिंह, प्रतापगढ़ स्थित कुंडा के बेतीं थाना स्थित बानेमऊ गांव निवासी आलोक रंजन मौर्य, अंबेडकर नगर स्थित हंसवर के कटोखर निवासी पंकज कुमार यादव, गाजीपुर के सैदपुर थाना क्षेत्र स्थित मुड़ियार गांव निवासी अरविंद प्रजापति और जौनपुर के सराय ख्वाजा थाना क्षेत्र स्थित खमौरा गांव निवासी सतीश विश्वकर्मा बताया। पंकज, अरविंद व सतीश झांसी में किराए पर रहते हैं। एसटीएफ ने इनके पास से तीन लैपटॉप और जीपीआरएस एक्टिवेटेड पांच मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इनसे पूछताछ में यह भी सामने आया है कि बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के छात्र सहरान सिद्दीकी और जीतू यादव भी इसी तर्ज पर गैंग चला रहे हैं।

ऐसे निकालते थे रकम

एटीएम बूथ में पहले से ही खुफिया कैमरा लगा देते थे। पैसा निकाल रहे लोगों के पीछे खड़े होकर भी पिन कोड और उस पर अंकित बैंक के आखिरी छह डिजिट पढ़ लेते थे। दरअसल हर कार्ड पर एक क्षेत्र के 14-15 नंबर एक ही होते हैं। एस्कीमर मशीन से एटीएम, डेबिट कार्ड व क्रेडिट कार्ड का क्लोन तैयार करते थे। उसके बाद लैपटॉप के जरिए विभिन्न ई-कामर्स वेबसाइटों से खरीदारी करते थे और दूसरे का मोबाइल फोन रिचार्ज कराते थे।

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500 रुपये में 1000 का रिचार्ज

गिरोह के सदस्यों के संपर्क में 250 से अधिक लोग थे। यह लोग नियमित उनसे अपने मोबाइल फोन रिचार्ज कराते थे। मोबाइल फोन धारक से 500 रुपये लेकर 1000 रुपये रिचार्ज करा देते थे।

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लैपटॉप से मिले अहम सुराग

कानपुर में तीन मुकदमे दर्ज होने के अलावा झांसी के एक बैंक से 30 से अधिक मामले सामने आए हैं, जिनमें ग्राहकों ने बैंक से शिकायत की है। एसटीएफ को इसी सिलसिले में छात्रों के पास से मिले लैपटॉप से भी अहम जानकारियां मिली हैं। दो निजी कंपनियों के अधिकारियों ने भी गैंग को पकड़ने में एसटीएफ की काफी मदद की है।

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