दो सगे भाइयों ने एक ही महिला से रचाई शादी

 
Nov 07, 12:13 am

सिद्धार्थनगर [नजीर मलिक]। द्वापर युग में द्रौपदी ने पांच पांडवों को अपना पति स्वीकार किया था, वहीं कलयुग में कैलाशी के इस कदम से हर कोई हतप्रभ है। फर्क सिर्फ इतना है कि उसके पति पांच नहीं बल्कि दो होंगे, जिनके साथ वह महीने में 15-15 दिन रहेगी। इस बात की जानकारी गांव में हर किसी को थी।

रविवार दोपहर खेसरहा थाने से मात्र पचास मीटर दूर मुख्य सड़क पर एक छोटे से पक्के मकान में शादी की रस्में पूरी की गई। दूल्हा थे दो सगे भाई छोटे लाल और झीनक वर्मा , जबकि पत्‍‌नी थी चार बच्चों की मां कैलाशी देवी (45)। मंत्रोच्चार के बीच दोनों भाइयों ने कैलाशी के साथ सात फेरे लिए और उसके गले में अलग-अलग मंगल सूत्र डाले। शादी में दो सिंहोरे का भी प्रयोग हुआ। तीनों पति-पत्‍‌नी के रूप में बेहद खुश हैं। मूंगफली बेच कर जीवन-यापन करने वाले दोनों भाई इस उम्र में भी अविवाहित थे।

कैलाशी संग एक साथ ब्याह रचाने के सवाल पर छोटेलाल व झीनक ने बताया कि दोनों भाइयों में बेहद प्रेम है। अपनी सोच के अनुसार दोनों को एक साझा दूल्हन की तलाश थी, मगर इसके लिए कोई लड़की राजी न होती थी। आखिर पड़ोस के ग्राम पकड़डीहा के राम नारायन वर्मा की विधवा पुत्री और चार बच्चों की मां कैलाशी से रिश्ते की बात चली। पहले तो कैलाशी का पिता अपनी पुत्री का विवाह दोनों भाइयों से करने को राजी नहीं था, मगर कहीं और बात न बनते देख और कैलाशी की सहमति के बाद वह राजी हो गया। एक ही पत्‍‌नी के साथ दोनों कैसे रहेंगे, इस पर दोनों भाइयों का कहना था कि वह महीने में 15 दिन एक की पत्‍‌नी के रूप में और शेष 15 दिन दूसरे की पत्‍‌नी बन कर रहेगी। वहीं, इस बारे में कैलाशी का कहना था कि वह इस शादी से खुश है।




लेख को दर्जा दें

दर्जा दें

0 out of 5 blips

(36) वोट का औसत

average:4.52778
Saving...
    शीर्षकों को अपने "मेरा याहू " पृष्ट पर शामिल करें
  • राजनीति
    Add to My Yahoo! xml
  • अपराध
    Add to My Yahoo! xml
  • दुर्घटना
    Add to My Yahoo! xml
  • आतंकवाद
    Add to My Yahoo! xml
इस पृष्ठ की सामग्री जागरण प्रकाशन लिमिटेड द्वारा प्रदान की गई है
कॉपीराइट © 2009 याहू वेब सर्विसेज़ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड सर्वाधिकार सुरक्षित