नई दिल्ली [जरनैल सिंह]। समर खान की फिल्म 'शौर्य' में सेना की धर्मनिरपेक्ष छवि पर कड़े प्रहार से सेना तिलमिला गई है। सेना को डर है कि इस फिल्म का कश्मीर में उसके बारे में दुष्प्रचार करने और सेना के खिलाफ माहौल बनाने के लिए गलत इस्तेमाल हो सकता है।
सूत्रों के मुताबिक सैन्य खुफिया विभाग द्वारा फिल्म के पहले शो से ही नकारात्मक संकेत देने के बाद फिल्म की पायरेटेड सीडी मंगाकर जनरल दीपक कपूर समेत तमाम शीर्ष सैन्य अधिकारियों को भेज दी गई है। शीर्ष सैन्य अधिकारी इस फिल्म के कथानक को लेकर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।
इससे पहले 'रंग दे बसंती' को तत्कालीन रक्षा मंत्री प्रणब मुखर्जी व तीनों सेनाध्यक्षों के स्कैनर के तले से गुजरना पड़ा था। हालंाकि रंग दे बसंती में तो सिर्फ एक समस्या [लड़ाकू विमान हादसे] की तरफ ही ध्यान दिलाया गया था पर यहां सेना की धर्मनिरपेक्ष छवि को तार-तार करने की कोशिश की गई है।
फिल्म में कैप्टन जावेद खान को गद्दारी के आरोपों में फंसाने का जाल बुना गया है और ऐसी ध्वनि दी गई है कि भारतीय सेना में धर्म के आधार पर अफसरों के साथ भेदभाव होता है। खास कर कश्मीर में जहां जम्मू-कश्मीर लाइट इनफेंट्री रेजीमेंट में बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक जवान हैं। उनके दिलो-दिमाग पर भी यह गलत असर डाल सकती है। यही नहीं कश्मीर में स्थानीय युवकों को सेना में [टेरिटोरियल आर्मी] में भर्ती करने की जो कवायद पिछले कुछ समय से शुरू की गई है और रिस्पांस अच्छा मिल रहा है। लेकिन फिल्म में अल्पसंख्यकों के मन में सेना के बारे में शक के बीज बो सकती है।
समर खान की इस फिल्म में सेना के दो वकील मेजर सिद्धांत चौधरी और मेजर आकाश कपूर कैप्टन जावेद के मामले में आमने सामने हैं। ब्रिगेडियर रूद्र प्रताप सिंह कैप्टन जावेद पर सेना में गदर भड़काने का आरोप लगाता है।
सेना के वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि इस फिल्म में मीडिया को भी ढाल बनाया गया है और पत्रकार को सच्चाई का हिमायती के तौर पर पेश कर सेना की छवि को चोट पहुंचाई गई है।
फिल्म में सेना में आपसी गोलीबारी की घटना को भी केंद्र में रखा गया है जो कि आज वाकई एक सच्चाई है पर सेना को सबसे ज्यादा अपनी धर्मनिरपेक्ष छवि पर चोट पहुंचाए जाने से चिंता है।