तमिलनाडु ने होगेनक्कल परियोजना रोकी

चेन्नई। तमिलनाडु सरकार ने होगेनक्कल पेयजल परियोजना पर मचे बवाल को देखते हुए कर्नाटक विधानसभा चुनाव तक इस पर रोक लगा दी है। वहीं, कन्नड़ संगठनों ने इसका स्वागत किया है और परियोजना के विरोध में 10 अप्रैल को प्रस्तावित बंद वापस ले लिया है। इस बीच इन संगठनों ने दक्षिण के सुपरस्टार रजनीकांत के बयान के विरोध में उनका पुतला जलाया और उनकी फिल्में न प्रदर्शित होने देने तथा उन्हें राज्य में न घुसने देने का भी ऐलान किया।

गौरतलब है कि होगेनक्कल परियोजना को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच तीखा विवाद छिड़ा हुआ है। कई जगह हिंसक प्रदर्शन होने के बाद दोनों राज्यों के फिल्मी सितारे भी आमने-सामने आ खड़े हुए हैं।

शनिवार को मुख्यमंत्री एम करुणानिधि ने कहा कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव संपन्न होने तक हमें शांति बनाए रखनी होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि कर्नाटक की नई सरकार तमिलनाडु की आकांक्षाओं को समझेगी। करुणानिधि ने कहा कि हम कर्नाटक की नई सरकार से 1998 में इस परियोजना को लेकर दोनों राज्यों के बीच हुए समझौते का पालन करने का अनुरोध करेंगे।

कर्नाटक में नई विधानसभा के गठन के लिए मई में चुनाव होने हैं। करुणानिधि ने राज्य की जनता से संयम बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि अगर कर्नाटक की नई सरकार ने भी इस परियोजना को रोकने की कोशिश की तो तमिल जनता अपना आत्मसम्मान नहीं छोड़ेगी। चाहे उसे अपनी जिंदगी और संपत्ति ही क्यों न गंवानी पड़े।

करुणानिधि के परियोजना रोकने के कदम के बाद कन्नड़ समर्थक संगठनों ने 10 अप्रैल को प्रस्तावित अपने बंद को वापस ले लिया है। कर्नाटक रक्षणा वेदिके के सदस्य ने बताया कि कार्यकर्ता राज्य में तमिल फिल्में दिखाए जाने का विरोध जारी रखेंगे।

उधर, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एस एम कृष्णा ने कहा है कि इस मुद्दे को बातचीत के जरिए सुलझाने की जरूरत है इसलिए करुणानिधि का परियोजना रोकने का वक्तव्य स्वागतयोग्य है। इससे पहले कृष्णा ने कहा था कि होगेंक्काल मुद्दे पर राज्य सुप्रीमकोर्ट की शरण लेगा। उन्होंने कहा था कि उनको इस बात की चिंता नहीं है कि इससे डीएमके मुश्किल में पड़ सकता है या फिर केंद्र की संप्रग सरकार प्रभावित होगी। रजनीकांत द्वारा उन पर और अन्य नेताओं पर लगाए गए साजिश के आरोप पर उन्होंने कहा कि मैं कोई टिप्पणी करना नहीं चाहता लेकिन रजनीकांत को अब अपने वक्तव्य के बारे में सोचना चाहिए।

इस बीच, रजनीकांत के बयान के विरोध में कन्नड़ रक्षणा वेदिके ने प्रदर्शन किया और उनका पुतला फूंका। वेदिके के एक कार्यकर्ता ने कहा कि हम उनकी फिल्मों की यहां स्क्रीनिंग नहीं होने देंगे तथा उन्हें राज्य में कदम नहीं रखने देंगे।

होगेंक्काल पर क्यों है बवाल

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम करुणानिधि ने राज्य के धर्मपुरी और कृष्णागिरी जिलों को पेयजल मुहैया कराने के लिए 26 फरवरी को होगेंक्काल परियोजना की आधारशिला रखी थी। इन जिलों में फ्लोराइड की अधिक मात्रा होने के कारण पीने योग्य पानी की समस्या है। धर्मपुरी से 40 किलोमीटर दूर मशहूर पर्यटक स्थल होगेंक्काल जलप्रपात के नाम पर इस परियोजना का नाम पड़ा। कर्नाटक का विरोध इस बात को लेकर है कि परियोजना के लिए कावेरी नदी से जल लिया जाएगा। इससे उसे मिलने वाले पानी की मात्रा में कमी आ सकती है। यही वजह है कि 1334 करोड़ रुपये की इस परियोजना के आरंभ होते ही वहां इसका तीव्र विरोध शुरू हो गया।




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