राज्यपाल की गांधीगिरी पर वाम हुआ लाल

 
May 07, 08:30 pm

कोलकाता। पिछले दो महीने से बिजली की आपूर्ति बंद होने से परेशान आम नागरिकों का साथ देने के लिए पश्चिम बंगाल के राज्यपाल गोपालकृष्ण गांधी ने राजभवन में भी स्वैच्छिक बिजली आपूर्ति बंद करने का आदेश दिया है। इस आदेश का अनुपालन बुधवार से ही राजभवन में किया गया और दो घंटे के लिए बिजली बंद कर दी गई। इस दौरान बल्ब, पंखे, एयर कंडीशनर आदि बिल्कुल बंद रहे। यहां तक कि लिफ्ट का परिचालन भी नहीं हुआ। हालांकि, राज्यपाल द्वारा अपनाया गया गांधीगिरी का यह तरीका सत्तारूढ़ वाम नेताओं को नागवार गुजरा है और वे इस निर्णय को लेकर काफी आक्रोश में आ गए हैं।

राज्यपाल के इस निर्णय से वाम नेता इस कदर नाराज हुए कि उन्होंने राज्यपाल के पद के औचित्य पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। नाराज नेताओं ने जोर देकर कहा कि इस बात पर बहस होनी चाहिए कि क्या वास्तव में देश को राज्यपालों की आवश्यकता है।

राज्यपाल के स्वैच्छिक बिजली बंद के आदेश के तहत आज से राजभवन में दोपहर 1.30 बजे से 2.30 बजे तक पंखे और लिफ्ट बंद रहेगी। राजभवन के प्रवक्ता ने बताया कि इसी तरह एक अन्य स्वैच्छिक कदम के रूप में शाम को छह बजे से सात बजे तक बिजली बंद की जाएगी। उन्होंने बताया कि जरूरत होने पर राज्यपाल के निर्णय की समीक्षा की जाएगी। ऐसे में गर्मी के इस मौसम में राज्यपाल गांधी और उनका समूचा अमला आज से आम जनता को दरपेश पावर कट और बिजली की अन्य समस्याओं के मद्देनजर अब हर दिन दो घंटे बिना बिजली के पसीना बहाएंगे।

राज्यपाल के निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्य के बिजली मंत्री मृणाल बैनर्जी ने कहा कि यह निर्णय ऐसे समय में आया है जबकि पिछले दस दिनों में बिजली की समस्या कम हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि एक व्यक्ति एक समय खाना नहीं खाता क्योंकि खाद्यान्न की समस्या है तो ऐसे में हम क्या कर सकते हैं।

इस संदर्भ में प्रतिक्रिया स्वरूप वरिष्ठ सीपीआई नेता बिमान बोस ने कहा कि राज्यपाल के उक्त निर्णय व उनके वक्तव्य को लेकर वह ज्यादा कुछ टिप्पणी नहीं करेंगे लेकिन मेरा मानना है कि आजादी के साठ साल के बाद पूरे देश में इस बात पर चर्चा व बहस होनी चाहिए कि क्या राज्यपाल का पद एक जरूरी आवश्यकता है।

राज्यपाल का उक्त निर्णय ठीक एक महीने बाद आया है जब उन्होंने नंदीग्राम की स्थिति नियंत्रित न होने को लेकर राज्य सरकार की घोर आलोचना की थी। मेट्रो शहरों में बिजली आपूर्ति की बुरी हालत के संदर्भ में राज्यपाल का यह निर्णय राज्य की वाम सरकार के लिए परेशानी का सबब बन गया है। इसके विरोध में वाम नेता काफी उबल उठे हैं और राज्यपाल का पद और उसकी भूमिका पर ही सवाल खड़ा कर दिया है।

उधर, सीपीआई-एम के जनरल सेक्रेटरी प्रकाश करात ने मदुरै में कहा है कि यदि कोई व्यक्ति बिजली बंद करके बिजली बचत को तरजीह दे रहा है तो यह एक अच्छा कदम है। हमें इस बात पर आपत्तिनहीं होना चाहिए।

देश में राज्यपालों की आवश्यकता है या नहीं, इस पर बहस कराए जाने के एक सवाल के जवाब में करात ने कहा कि यह एक अलग विषय व मुद्दा है। लेकिन इस बात की आवश्यकता जरूर है कि राज्यपाल की भूमिका को फिर से परिभाषित किया जाना चाहिए।




लेख को दर्जा दें

दर्जा दें

0 out of 5 blips

(3) वोट का औसत

average:4.666666
Saving...
    शीर्षकों को अपने "मेरा याहू " पृष्ट पर शामिल करें
  • राजनीति
    Add to My Yahoo! xml
  • अपराध
    Add to My Yahoo! xml
  • दुर्घटना
    Add to My Yahoo! xml
  • आतंकवाद
    Add to My Yahoo! xml
इस पृष्ठ की सामग्री जागरण प्रकाशन लिमिटेड द्वारा प्रदान की गई है
कॉपीराइट © 2009 याहू वेब सर्विसेज़ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड सर्वाधिकार सुरक्षित