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लद्दाख में हवाई पट्टी चालू करेगा भारत

May 09, 02:39 pm
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नई दिल्ली। चीन के साथ सैन्य संतुलन साधने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण सामरिक कदम उठाते हुए भारतीय वायुसेना लद्दाख क्षेत्र में करीब 17,000 फुट की ऊंचाई पर एक हवाई पट्टी को फिर से चालू करने जा रही है।

वायुसेना के सूत्रों ने बताया कि दौलत बेग ओल्दी [डीबीओ] नाम की यह हवाई पट्टी आखिरी बार 1965 में इस्तेमाल की गई थी, जो चीन द्वारा हड़प लिए गए अकसाई चिन क्षेत्र से महज दस किलोमीटर की दूरी पर है। इस हवाई पट्टी को विमान उतरने लायक बनाने के लिए युद्ध स्तर पर काम चल रहा है और 43 साल बाद इसके अगले महीने चालू हो जाने की संभावना है।

सूत्रों ने कहा कि हवाई पट्टी की सतह को एएन-32 जैसे परिवहन विमान उतरने के लायक बनाया जा रहा है और वहां स्थित हेलीपैड को एक किनारे पर खिसकाया गया है। यह काम अब लगभग पूरा होने को है। करीब 2000 फुट की यह हवाई पट्टी चालू होने पर विश्व का सबसे ऊंचा एयरफील्ड होगा जहां विमान उतर सकेंगे और उड़ान भर सकेंगे।

दौलत बेग ओल्दी हवाई पट्टी को चालू करना देश की पूर्वी सीमा को चाक चौबंद करने के लिए तेजी से चल रहे प्रयासों का हिस्सा है। हाल के दिनों में लद्दाख से लेकर अरुणाचल तक सरकार चीन से लगी पूरी सीमा के आसपास ढांचागत सुविधाओं पर खास ध्यान दे रही है। सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश समेत पूर्वोत्तर क्षेत्र में 32 एयरफील्ड को सक्रिय बनाया जा रहा है। इनमें से आठ एयरफील्ड अकेले अरुणाचल की तावांग घाटी में है। तावांग की 96 हजार वर्ग किलोमीटर की घाटी पर चीन अपना दावा करता रहा है जिसे भारत गैर कानूनी करार दे चुका है।

इस बीच, तेजपुर में भी भारतीय वायुसेना अपने एयरबेस को नया रूप दे रही है और वहां सुखोई 30 एमकेआई लड़ाकू विमानों का एक स्क्वेड्रन तैनात किए जाने की योजना है। शुमित मुखर्जी कमेटी वायुसेना के संसाधनों की नए सिरे तैनाती के बारे में आगामी दस साल की योजना पर अपनी रिपोर्ट दे चुकी है और समझा जाता है कि उसमें भी पूर्वी सीमा पर खास ध्यान देने की बात कही गई है।

दूसरी ओर सीमा सड़क संगठन चीन से लगी पूरी सीमा के आसपास 61 सड़कों के निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की घोषणा कर चुका है। इनमें से 27 सड़कें अरुणाचल में है। करीब 3400 किलोमीटर की सड़कों का यह जाल 2012 तक बनकर तैयार हो जाएगा।

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