
मुंबई। वर्ष 1992-93 के दंगों में हिंसा के आरोपी शिवसेना विधायक गजानंद किर्तीकर और शिवसेना के ही मुंबई कार्पोरेटर रविंदर वालीकर को शुक्रवार को विशेष दंगा अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। साथ ही शिवसेना के 18 कार्यकर्ताओं को भी छोड़ दिया गया। इस संबंध में किर्तीकर, वलीकर और शिवसेना के 18 अन्य समर्थकों के खिलाफ वर्ष 2000 में जोगेश्वरी थाने में मामला दर्ज किया गया था।
मजिस्ट्रेट आरसी बापट सरकार ने कहा कि जांचकर्ता पुलिस अधिकारी अभियुक्तों के खिलाफ आरोप सिद्ध नहीं कर सके। उन्होंने सबूतों के अभाव में सभी 20 अभियुक्तों को रिहा कर दिया। अभियोजन पक्ष के मुताबिक किर्तीकर और शिवसेना के अन्य नेताओं ने 7 दिसंबर, 1992 में एक मोर्चा निकाला था और जोगेश्वरी की एक मस्जिद पर पथराव किया था। पुलिस ने जब दंगाईयों को रोकने का प्रयास किया तो किर्तीकर और वालीकर की अगुवाई में शिवसेना के समर्थकों ने पुलिस अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार किया था। पुलिस ने मामला दर्ज करने के बजाए घटना का सारा ब्यौरा तत्काल स्टेशन डायरी में दर्ज किया था।
शिवसेना नेता कीर्तिकर की पैरवी कर रहे वकील जयप्रकाश बगोरिया ने बताया कि पुलिस अदालत के समक्ष वह डायरी प्रस्तुत ही नहीं कर पाई। पुलिस ने अदालत के समक्ष कहा कि 16 वर्ष के लंबे अंतराल में वह डायरी कहीं गुम हो गई। इस आधार पर अदालत ने अभियुक्तों के खिलाफ सबूतों को अपर्याप्त पाया और सभी को रिहा कर दिया। वलीकर ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने हमें इस मामले में गलत तरीके से फंसाया था। वह ऐसा करके मुस्लिम वोट हासिल करना चाहती थी। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ कोई प्रमाण या सबूत नहीं था और हमारी बेइज्जती करने के लिए मामले को 16 वर्षो तक खींचा गया।