नई दिल्ली। सुप्रीमकोर्ट ने बड़े उद्योगपतियों को खरीद-फरोख्त और पैसे की ताकत सहित अन्य अनुचित तरीकों से राज्य सभा के सदस्य बनने से रोकने के लिए दिशा निर्देश जारी करने की मांग करने वाली याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी।
न्यायमूर्ति अरिजित पसायत और न्यायमूर्ति पी सदाशिवम की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता संगठन सिटिजंस कंसंटीट्यूशनल प्रेरोगेटिव से कहा कि वह अपनी बात सक्षम अधिकारियों या संसद के समक्ष रखे।
न्यायालय ने कहा कि वह इस मामले में याचिकाकर्ता की मदद नहीं कर सकता क्योंकि इस तरह के मामलों पर रोक लगाने संबंधी कानून बनाने का काम संसद का है। याचिका में दलील दी गई थी कि औद्योगिक समूह और कारपोरेट सेक्टर गुपचुप तरीके से राज्य के लोगों के उस अधिकार को खत्म कर रहे हैं जिसमें उनका प्रतिनिधित्व उनके ही राज्य का व्यक्ति ही कर सके। खंडित जनादेश के चलते उद्योगपति निर्दलीय और राजनीतिक पार्टियों के सदस्यों को लालच देकर व्हिप का पालन नहीं करने के लिए मजबूर करते हैं।