
नई दिल्ली। पोखरण 2 की 10वीं वर्षगांठ रविवार को बिना किसी आधिकारिक आयोजन के गुजर गई। विपक्षी भाजपा ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह ऐसा न करके पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का अपमान कर रही है जिन्होंने परमाणु परीक्षण की शुरुआत की थी।
भारत ने पहला परमाणु परीक्षण 1974 में 18 मई को किया था। जिसे 'बुद्धा स्माइलिंग' [बुद्ध मुस्कुराए] कूट नाम दिया गया। बुद्ध एक बार अटलबिहारी वाजपेयी सरकार के समय फिर मुस्कराए जब 11 और 13 मई 1998 को भारत ने पांच परमाणु परीक्षण किए। संप्रग सरकार को आए चार साल हो गए हैं और यह पोखरण परीक्षणों की वर्षगांठ नहीं मना रही है।
रक्षा राज्य मंत्री एमएम पल्लम राजू ने हाल में कहा था कि हमने जो हासिल किया है उस पर गर्व करने की कई वजह हैं। पोखरण पर गर्व होना ही एक समारोह है लेकिन मुझे [1998 के] परीक्षणों का समारोह मनाने की कोई वजह नजर नहीं आती। राजू ने कहा कि पोखरण के परीक्षणों ने भारत की क्षमता का प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि प्रतिबंध लगने संबंधी इसके विपरीत प्रभाव भी हैं जिससे हमारे सामरिक एवं महत्वपूर्ण कार्यक्रम प्रभावित हुए जो देश के लिए महत्वपूर्ण थे।
पोखरण 2 की वर्षगांठ न मनाने को दास मानसिकता करार देते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि यह देश के रक्षा विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों के प्रति असम्मान है। यह इंदिरा गांधी के प्रति असम्मान है। वह पहली व्यक्ति थीं जिन्होंने परमाणु परीक्षण की शुरुआत की। वाजपेयी ने वर्ष 1998 में जो कुछ किया वह तो इसका परिणाम था।
भाजपा के एक अन्य नेता जसवंत सिंह ने कहा कि 1998 में हुए परमाणु परीक्षणों के बाद भारत के प्रति दुनिया का नजरिया बदल गया। भारत अमेरिका परमाणु करार इसका तार्किक विकास है।
वामदलों के नेता इस तथ्य से सहमत नहीं हुए। भाकपा के महासचिव एबी बर्धन ने कहा कि इसमें आयोजन के लिए ऐसा क्या है। यह हकीकत है कि हमने बम परीक्षण किया। उनकी पार्टी के एक अन्य नेता डी राजा ने कहा कि हमारे मन में वैज्ञानिकों के लिए सम्मान है लेकिन वामदल पोखरण द्वितीय परीक्षणों के खिलाफ हैं।