
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। अल्पसंख्यक संस्थाओं के दस स्कूलों ने सुप्रीमकोर्ट में याचिका दाखिल कर नर्सरी में प्रवेश के लिए तय दिशा निर्देशों को चुनौती दी है। सुप्रीमकोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली इस याचिका पर दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है।
न्यायमूर्ति बीएन अग्रवाल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कारमल कानवेंट स्कूल व अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर वकील रोमी चाको की दलीलें सुनने के बाद राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस जारी किया। याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट के गत वर्ष 19 नवंबर के आदेश को चुनौती दी गई है। इस आदेश में हाईकोर्ट ने नर्सरी स्कूलों में प्रवेश में बच्चों के इंटरव्यू पर रोक लगाने के साथ ही प्रवेश के कई और मानक भी तय किए थे।
याचिकाकर्ता अल्पसंख्यक संस्थाओं के स्कूलों की दलील है कि दिल्ली हाईकोर्ट के प्रवेश के मानक तय करने वाले आदेश से संविधान के अनुच्छेद 30 में प्राप्त अधिकारों का उल्लंघन होता है। संविधान में अल्पसंख्यक संस्थाओं को अपने शिक्षण संस्थान चलाने, प्रबंधन व प्रवेश का अधिकार दिया गया है। ये संस्थान 50 फीसदी प्रवेश अपने समुदाय को दे सकते हैं लेकिन हाईकोर्ट के आदेश से यह अधिकार समाप्त हो जाता है।
हाईकोर्ट के निर्देश और उसके बाद राज्य सरकार द्वारा जारी दिशानिर्देशों के मुताबिक स्कूलों को तय प्रवेश मानकों को शिक्षा निदेशक से मंजूर कराना होगा। यह शर्त ऐसे संस्थानों के प्रबंधन और प्रवेश के अधिकार में बाधा है।