इस तरह बना सिक्किम भारत का अभिन्न अंग

 
May 15, 04:46 pm

नई दिल्ली। सन् 1947 में भारत जब आजाद हुआ तो सिक्किम के राज परिवार ने राज्य को भारत संघ में मिलाने से इनकार कर दिया, लेकिन प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के प्रयासों से सिक्किम भारत का अभिन्न अंग बन गया।

इस व्यवस्था के तहत सिक्किम को विशेष दर्जा दिया गया और इस प्रांत के विदेश रक्षा, कूटनीतिक और संचार मामलों की देखरेख का काम भारत के पास आ गया। सन् 1955 में सिक्किम के राजा चोज्ञाल को संवैधानिक सरकार के गठन की मंजूरी देने के लिए एक राज्य परिषद का गठन किया गया, लेकिन इसी बीच सिक्किम नेशनल कांग्रेस की मांग के चलते प्रदेश में अशांति फैल गई। इतिहासकार मालती मलिक अनुसार सिक्किम के राजा चोज्ञाल लोगों में काफी अलोकप्रिय हो गए थे तथा सिक्किम नेशनल कांग्रेस राज्य में रहने वाले नेपालियों को और अधिक प्रतिनिधित्व देने के लिए चुनाव कराने की मांग कर रही थी।

चोज्ञाल की अलोकप्रियता के चलते सिक्किम में अशांति तथा अस्थिरता धीरे-धीरे बढ़ती गई और 1973 में हालात यहां तक पहुंच गए कि राजमहल के बाहर जमकर दंगे हुए। दंगों से फैली अस्थिरता के चलते सिक्किम ने भारत से मदद का औपचारिक आग्रह किया।

वर्ष 1975 में सिक्किम के काजी लेंदुप दोरजी खांगसरपा ने भारतीय संसद से राज्य के विशेष दर्जे को बदलकर इसे भारत का हिस्सा बनाने की मांग की। उनके इस अनुरोध पर भारत सरकार ने सेना को सिक्किम कूच का आदेश दे दिया। अप्रैल 1975 में भारतीय सेना ने गंगटोक को अपने कब्जे में लेकर राजमहल के सुरक्षाकर्मियों को नि:शस्त्र कर दिया। इसके बाद भारत सरकार ने सिक्किम के लोगों की इच्छा जानने के लिए वहां पर जनमत संग्रह कराया। जनमत संग्रह से यह बात सामने आई कि सिक्किम के लोग भारत का हिस्सा बनने में अपना हित देखते हैं और इसके चलते वहां के 97.5 प्रतिशत लोगों ने भारत संघ में शामिल होने के पक्ष में अपना मत दिया। जनमत संग्रह के कुछ सप्ताह बाद 16 मई 1975 को सिक्किम को भारत का राज्य बनाए जाने की घोषणा की गई।

सिक्किम के भारत में विलय को दुनियाभर ने अपनी मान्यता दे दी, लेकिन चीन काफी दिन तक इसे अलग देश ही मानता रहा। वर्ष 2003 में अंतत: चीन ने भी आधिकारिक तौर पर सिक्किम को भारत का हिस्सा मान लिया। दोनों देशों के बीच हुए समझौते के तहत चीन ने अपना आधिकारिक नक्शा जारी किया, जिसमें सिक्किम को भारत गणराज्य का हिस्सा दिखाया गया। छह जुलाई 2006 को दोनों देशों के बीच सीमा पार व्यापार के लिए नाथूला दर्रे को खोल दिया गया।




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