खुले में शौच से रुक सकती है वेतनवृद्धि

 
May 16, 02:31 am

नई दिल्ली [सुरेंद्र प्रसाद सिंह]। खुले में शौच करने वालों के चुनाव लड़ने पर पाबंदी लग सकती है तो नौकरीपेशा लोगों की वेतन वृद्धि पर रोक। यही नहीं, रिटायर्ड कर्मचारियों की पेंशन पर भी गाज गिरना संभव है। इस तरह के नायाब कानून के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय का एक प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन है। सभी राज्य सरकारों को भी प्रस्ताव भेजा गया है।

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा कि स्वच्छ पेयजल और शौचालय जैसे महत्वपूर्ण विषय को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। केंद्रीय कानून मंत्रालय ग्रामीण विकास मंत्रालय के इस प्रस्ताव के विभिन्न पहलुओं की जांच-पड़ताल कर रहा है। राज्य सरकारों को इस बारे में पहले ही पत्र लिखकर आगाह कर दिया गया है। रघुवंश ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े-बड़े मकान बनाने में कोई कोताही नहीं बरती जाती, लेकिन शौच के लिए ज्यादातर लोग अब भी बाहर मैदानों में ही जाते हैं। इससे जहां संक्रामक रोगों का प्रकोप ज्यादा होता है, वहीं विश्व स्तर पर देश की छवि प्रभावित होती है।

पेयजल और स्वच्छता पर सभी राज्यों के सचिवों का दो दिवसीय सम्मेलन भी आयोजित किया गया था। इसका ब्यौरा देने आए ग्रामीण विकास मंत्री रघुवंश ने कहा कि अब कुछ सख्ती बरतने का समय आ गया है। इसके लिए पहले एक प्रस्ताव कानून मंत्रालय के भी विचाराधीन है। इसमें कुछ सख्त प्रावधान करने के प्रस्ताव हैं। इसके तहत पंचायतों में ऐसे लोगों को चुनाव लड़ने का मौका नहीं दिया जाएगा, जिनके घरों में शौचालय नहीं होंगे। सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकान चलाने वालों के लाइसेंस रद किए जा सकते हैं, जिनके यहां शौचालय नहीं होंगे। नौकरी करने वाले ऐसे लोगों की वेतनवृद्धि रोकी जा सकती है, जिनके यहां यह सुविधा नहीं होगी। इसी प्रकार सेवानिवृत्त लोगों की पेंशन भी रोकी जा सकती है।

ट्रेनों के शौचालयों पर भड़कते हुए रघुवंश ने कहा 'पूरी रेल लाइनों पर पाखाना छींटने को लेकर उन्हें सख्त आपत्ति है, इससे रेल मंत्रालय को अवगत करा दिया गया है। वहां अनुसंधान कराया जा रहा है। लालू ने पहले ही हवाई जहाज स्टाइल में शौचालय की घोषणा कर रखी है।'

बौद्धकाल में भी शौचालय होते थे। वहीं गांधीजी का पूरा जोर स्वच्छता पर था। उनका कहना था कि आजादी से पहले स्वच्छता जरूरी है। ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा कि इस दिशा में कुछ प्रगति तो हुई है, लेकिन इसकी जरूरत शत-प्रतिशत है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 2012 की अवधि निर्धारित की गई है। चालू वर्ष में 54 प्रतिशत ग्रामीण बस्तियों के सभी घरों में शौचालय बनाने का लक्ष्य है।




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