
जयपुर [जागरण संवाददाता]। वास्तव में आतंकवाद ने करीब डेढ़ दशक पूर्व ही राजस्थान में दस्तक दे दी थी। इस दौरान आई सरकारे व मौजूदा सरकार गफलत में रहीं और आतंकी जयपुर में धमाके करने में कामयाब रहे।
राजस्थान की राजधानी में 1993 में भी मानक चौक, जालूपुरा व कोतवाली थाना क्षेत्रों में एक ही दिन में तीन जगह विस्फोट हुए थे। इस मामले में मुंबई के डा. जलीश अंसारी, उत्तर प्रदेश के जमाल अलवी, अबरे रहमत अंसारी व डा. हबीब अहमद नामजद हुए थे। अजमेर स्थित विशेष टाडा अदालत में यह मामला अभी विचाराधीन है। इसी तरह दौसा जिले के समलेटी गांव के निकट 22 मई, 1996 को आगरा से जयपुर आ रही राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम की बस में एक सीट के नीचे बम में विस्फोट हुआ, जिससे 14 लोग मारे गए और 39 घायल हो गए थे। अभी तक यह मामला अदालत में चल रहा है।
जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में हुए बम विस्फोट के बाद भी सरकार व पुलिस ने कोई सबक नहीं लिया। 26 जनवरी 1996 को गणतंत्र दिवस समारोह शुरू होने से कुछ समय पूर्व ही स्टेडियम में यह बम फट गया था। इस प्रकरण में निचली अदालत ने अप्रैल 2000 में पाकिस्तानी नागरिक अब्दुल मतीन को उम्र कैद व तीन अन्य को सजा सुनाई थी। इसकी अपील अभी भी उच्च न्यायालय में लंबित है। अजमेर स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की विश्व प्रसिद्ध दरगाह में विस्फोट की घटना तो ज्यादा पुरानी नहीं है। 11 अक्टूबर 2007 को हुए इस विस्फोट में दो लोग मारे गए थे। इस मामले में राज्य पुलिस अब तक किसी आरोपी को नहीं पकड़ पाई है।
सूत्रों ने बताया कि हैदराबाद, संकट मोचन मंदिर [वाराणसी] व गोरखपुर में हुई आतंकी वारदातों के बाद पकड़े गए अपराधियों ने जयपुर व राजस्थान में अपने संपर्को के सुराग दिए थे। इसके बावजूद राज्य पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उत्तर प्रदेश में पकड़े गए हुजी के आतंकी जलालुद्दीन मुल्ला उर्फ बाबू भाई ने भी जयपुर से अपने जुड़ाव की जानकारी दी थी, लेकिन राज्य पुलिस ने इस मामले में भी तफ्तीश की कोशिश ही नहीं की।