जयपुर [राजकिशोर]। आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर भाजपा जिन मुद्दों के लिए केंद्र को कठघरे में खड़ा करती रही है, राजस्थान में वसुंधरा सरकार ने गिन-गिन कर वही गलतियां की। चाहे वह अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों को राज्य से बाहर निकालने का मामला हो या फिर पाकिस्तान सीमा पर ढाई साल में आश्चर्यजनक रूप से तीन लाख बीघा से ज्यादा जमीन बिक जाने का। इतना ही नहीं अजमेर शरीफ के आतंकी धमाकों के बाद भी वसुंधरा सरकार का शुतुरमुर्गी रवैया नहीं बदला।
अब बिल्कुल राजस्थान के दिल यानी जयपुर में जघन्य आतंकी वारदात के बाद बांग्लादेशी बस्तियों में ताबड़तोड़ छापे मारे जा रहे है। इससे पहले इस ज्वलंत समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया। अब भी राज्य के गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया बांग्लादेशियों को यहां से हटाने के मुद्दे पर लाचारी जता रहे है। वह कहते है कि बांग्लादेशियों को बीएसएफ के सुपुर्द किया जाता है। बीएसएफ उन्हे बांग्लादेश सरकार के सुपुर्द करने की कोशिश करती है, लेकिन वह उन्हे वापस लेने से मना कर देती है। बकौल कटारिया ऐसा कोई कानून नहीं है, जिसके तहत पाकिस्तानी नागरिकों की तरह बांग्लादेशियों को जेल में बंद किया जा सके।
कुल मिलाकर अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों के मुद्दे पर राजस्थान सरकार भी केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंदाज में हाथ खड़ा कर रही है। खुद राजस्थान सरकार के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में 50 हजार से ज्यादा बांग्लादेशी रह रहे है। जयपुर में ही बदरसा में सैकड़ों परिवार है। बांग्लादेशी है तो यहां पिछले एक दशक से, लेकिन पिछले तीन वर्ष में उनकी संख्या ज्यादा ही बढ़ी। देश में बांग्लादेशियों की बढ़ती संख्या के मुद्दे पर केंद्र को घेरने वाली भाजपा शासित राजस्थान सरकार ने अपनी नाक के नीचे हो रही घुसपैठ को नहीं पहचाना।
इतना ही नहीं, बाड़मेर और जैसलमेर की पाकिस्तान से जुड़ी सीमा पर ढाई साल केअंदर तीन लाख बीघा जमीन बिक गई। मरुस्थल की यह जमीन किसी काम की नहीं, इसके बावजूद इतनी तेजी से इसका बिकना राज्य सरकार को विचित्र नहीं लगा। भाजपा के ही सांसद मानवेंद्र सिंह ने यह मामला लोकसभा में उठाया तो गृह मंत्रालय ने जांच शुरू की। पता चला कि बीएसएफ की जमीन तक बेच डाली गई। शुरुआती जांच में जमीन खरीदने वालों के नाम-पते भी फर्जी निकले। इसके बावजूद वसुंधरा सरकार नहीं चेती और इस पूरे प्रकरण की जांच में ढिलाई केलिए उसे गृह मंत्रालय की फटकार सुननी पड़ी।
इसी क्रम में खोखरापार-मुनाबाव ट्रेन में पाकिस्तान से नकली करेसी आने की कई घटनाएं हुई। इस तस्करी पर भी राज्य प्रशासन ने गंभीरता से प्रयास नहीं किए। और तो और देश का सबसे बड़ा पर्यटन स्थल होने के बावजूद राज्य सरकार ने पर्यटकों की संख्या के मद्देनजर सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए। ऐतिहासिक स्मारकों और पर्यटन स्थलों की मरम्मत कर उनकी शोभा बढ़ाई, प्रचार-प्रसार किया, लेकिन पर्यटकों के साथ आने वाली सुरक्षा संबंधी दिक्कतों के बारे में सोचा ही नहीं। हालत यह है कि जयपुर में टूरिस्ट पुलिस का गठन तो किया गया, लेकिन उनकी संख्या 100 से भी कम है।
केंद्र पर नरम होने का आरोप लगता है, लेकिन जयपुर धमाकों के पीछे जिस संदिग्ध शमीम का नाम लिया जा रहा है, उसे अजमेर शरीफ विस्फोट के बाद भी गिरफ्तार किया गया था। क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक ग्वाला ने ही खुलासा किया कि शमीम को उस समय ऊपरी दबाव के चलते छोड़ा गया था। अब मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे खुद ऐसी किसी घटना से इनकार कर रही है। राजस्थान पुलिस के एक शीर्ष अधिकारी ने भी माना कि उनके पास आतंकवाद तो दूर, संगठित अपराधों से जूझने का कोई तंत्र ही नहीं है। अजमेर शरीफ की घटना के बाद अगर ऐसी सक्रियता दिखाई जाती तो शायद हालात अलग होते।
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किस मुंह से उठाएंगे आतंकवाद का मुद्दा
जयपुर, विशेष संवाददाता : भाजपा ने अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी 31 मई से 2 जून तक जयपुर में ही करने का फैसला किया है। मुख्य विपक्षी दल आतंकवाद के मोर्चे पर केंद्र को घेर रहा है और उसने साफ कहा है कि कार्यकारिणी का प्रमुख विषय भी मंहगाई और आतंकवाद होगा। देखना दिलचस्प होगा कि अजमेर शरीफ के बाद जयपुर में विस्फोटों के बाद अपनी ही सरकार की पोल खुलने के बाद उसके तेवर कैसे होंगे। राजस्थान के भाजपाई भी मान रहे है कि इस मौके पर आतंकवाद के लिए केंद्र को वह कैसे कोस पाएंगे।