सरकार ने पकड़ी फोन कंपनियों की गर्दन

 
May 17, 02:49 am

नई दिल्ली [अंशुमान तिवारी]। जयपुर धमाकों के बाद अब बारी फोन कंपनियों के माथे पर पसीना आने की है। मोबाइल हो या बेसिक, फोन कंपनियां मनचाहे ढंग से अपने नेटवर्क पर कोई नई सेवा या सुविधा शुरू नहीं कर सकेंगी। यही नहीं अगर कंपनियों ने सतर्कता एजेंसियों को छानबीन व मानीटरिंग की सुविधा देने में कोई ढील दिखाई तो कार्रवाई का चाबुक भी चलेगा।

जयपुर के धमाके सरकारी तंत्र पर अपना असर दिखाने लगे हैं। आतंकी मंसूबों की कामयाबी में बहुत उपयोगी साबित हो रहा फोन, खास तौर पर मोबाइल, एक बार फिर जांच एजेंसियों के निशाने पर है। सरकार को इस बात की पक्की खबर है कि पिछले कुछ महीनों में कई फोन कंपनियों ने सतर्कता एजेंसियों के साथ तालमेल और उन्हें जरूरी सुविधाएं देने में सुस्ती दिखाई है। इसलिए जयपुर धमाकों के बाद फोन कंपनियों पर सख्ती शुरू हो गई है।

13 मई को जयपुर में धमाकों के एक दिन बाद सभी फोन कंपनियों को दूरसंचार विभाग की तरफ एक लंबा और सख्त खत भेजा गया है। खत में यह ताकीद की गई है कि अब कोई भी कंपनी अपने नेटवर्क पर मनमाने ढंग से किसी तरह की नई सेवा या सुविधा शुरू नहीं कर सकेंगी। ऐसी किसी सेवा की शुरुआत से 15 दिन पहले कंपनी को दूरसंचार विभाग को सूचना देनी होगी और शुरुआत से पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि उस सेवा का इस्तेमाल करने वालों की छानबीन के लिए सतर्कता एजेंसियों को पर्याप्त सुविधाएं मुहैया कराई जाएं।

नई सेवाएं दूरसंचार विभाग का नजला गिरने की ठोस वजहें हैं। फोन कंपनियों, विशेष रूप से मोबाइल कंपनियों के बीच इस समय नई-नई मूल्य वर्धित सेवाएं शुरू करने की होड़ मची है। यह सेवाएं फोन के इस्तेमाल के नए-नए रास्ते खोल रही हैं। फोन अब केवल सामान्य बातचीत का माध्यम न रह कर मनोरंजन और सूचना के माध्यम में भी बदल रहा है। बढ़ता इस्तेमाल सुरक्षा के खतरे बढ़ा रहा है। ब्लैकबेरी सेवा को लेकर उठा हाल का विवाद भी सुरक्षा के पहलू से ही जुड़ा था।

यह नियम पहले से निर्धारित है कि फोन कंपनियों को नई सेवा शुरू करने से इस तरह के पर्याप्त इंतजाम करने होंगे जिनके जरिये उन सेवाओं का इस्तेमाल करने वालों की सतर्कता जांच की जा सके। लेकिन कंपनियों को नई सेवाएं शुरू करना तो याद रहा है, सतर्कता वाला सबक वह भूल गई हैं।

इसलिए इस चिट्ठी में विभाग ने साफ कहा है कंपनियां सतर्कता जांच की जरूरतें बहाल करने के मामले में लगातार ढील बरत रही हैं। जाहिर है कि सतर्कता एजेंसियों ने इस मामले में अपनी नाखुशी सरकार के सामने दर्ज कराई है और जयपुर के विस्फोटों के मद्देनजरअब फोन कंपनियों पर एक बार फिर सतर्कता संबंधी नियमों का शिकंजा कसने वाला है।




लेख को दर्जा दें

दर्जा दें

0 out of 5 blips

(191) वोट का औसत

average:4.162298
Saving...
    शीर्षकों को अपने "मेरा याहू " पृष्ट पर शामिल करें
  • राजनीति
    Add to My Yahoo! xml
  • अपराध
    Add to My Yahoo! xml
  • दुर्घटना
    Add to My Yahoo! xml
  • आतंकवाद
    Add to My Yahoo! xml
इस पृष्ठ की सामग्री जागरण प्रकाशन लिमिटेड द्वारा प्रदान की गई है
कॉपीराइट © 2009 याहू वेब सर्विसेज़ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड सर्वाधिकार सुरक्षित