लोहरकी गांव को बिसरे देशवासी

 
May 17, 08:43 pm

जैसलमेर। आज से 34 साल पहले 18 मई 1974 को राजस्थान में जैसलमेर जिले के पोखरण तहसील में लोहरकी गांव के पास प्रथम परमाणु परीक्षण किया गया था। इसके बारे में अब शायद ही किसी को जानकारी हो कि वह धरा कौन सी है, जिसने पूरे विश्व में भूचाल ला दिया था।

भारत के इस गौरवशाली स्थल लोहरकी गांव में सब कुछ सामान्य नजर आ रहा है। कई चीजें बदल गई है। किसी को याद नहीं कि प्रथम परमाणु स्थल की जगह कौन सी है। किसी ने अंदाज से स्थल कहीं बताया तो किसी ने कहीं। प्रथम परमाणु परीक्षण के कोई निशान भी बाकी नहीं हैं। आज से 34 वर्ष पूर्व 18 मई 1974 का दिन भारत के लिए गौरवशाली दिन था। दुनिया में परमाणु शक्ति संपन्न देशों में अपना नाम दर्ज करने की पहल भारत ने की थी। लोहरकी गांव के प्रथम परमाणु स्थल पर वैज्ञानिकों ने बटन दबाकर जब परमाणु विस्फोट किया तो पोखरण का नाम विश्व मानचित्र पर उभर आया।

इस दिन जैसलमेर की किस्मत के दरवाजे भी खुले जब इंदिरा गांधी ने यहां की ऐतिहासिक पटवों की हवेली व दीवान नथमल हवेली देखने के बाद जैसलमेर को विश्व मानचित्र पर उभारने का निश्चय किया। उन्होंने इन हवेलियों के संरक्षण के निर्देश दिए थे। जिला मुख्यालय से करीब 90 किमी दूर पोखरण रेंज में 11 मई 1998 को इसी तरह के पांच धमाके खेतोलाई गांव के निकट हुए। जिन्होंने भारत ने शक्तिशाली होने का संदेश विश्व समुदाय को दिया। इस विस्फोट के बाद मरुस्थलीय इलाके में चर्म रोग संबंधी बीमारियां पनपने और वर्षा का औसत बढ़ने की चर्चा आम रही।




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