
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। उच्च शिक्षा का सपना पूरा करने के लिए सरकार के सामने निजी क्षेत्र का दामन थामने के सिवा भले ही कोई दूसरा रास्ता न हो, लेकिन वह उस पर उनका नियंत्रण नहीं होने देगी।
मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह ने कहा कि उच्च शिक्षा का सभी की पहुंच में होना जरूरी है। यही वजह है कि सरकार बैंकों से कर्ज लेकर उच्च शिक्षा हासिल करने वाले छात्रों के लिए काउंटर गारंटी देने के बारे में विचार कर रही है।
अर्जुन सिंह ने भारतीय उद्योग जगत की अग्रणी संस्था एसोसिएटेड चैंबर्स आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री [एसोचैम] की ओर से शनिवार से यहां शुरू हुए चौथे अंतरराष्ट्रीय शिक्षा मेले के उद्घाटन पर पत्रकारों से यह बात कही। उन्होंने कहा कि सभी को उच्च शिक्षा मुहैया कराने पर सरकार अपनी प्रतिबद्धता पहले ही जता चुकी है। यही वजह है कि वह बैंकों से कर्ज लेकर पढ़ाई करने वाले छात्रों की गारंटी देने के एसोचैम के प्रस्ताव पर गंभीर है। सरकार के गारंटी लेने से एक तो संबंधित छात्रों के परिवार पर उसका बोझ नहीं पड़ेगा, जबकि छात्रों के ऋण लेने की राह आसान हो जाएगी। उन्होंने कहा कि वैसे तो शिक्षा के क्षेत्र में सुधारों के लिए एसोचैम ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय को 20 सुझाव दिए हैं, जिसमें यह भी शामिल है।
मानव संसाधन विकास मंत्री ने इससे पहले कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एक बार फिर साफ किया कि सरकार उच्च शिक्षा को बाजार की ताकतों के नियंत्रण के लिए नहीं छोड़ सकती। यह किसी काउंटर से खरीदने-बेचने की चीज नहीं हो सकती। उनका इशारा शायद एसोचैम को भी आगाह करने का था। खासकर उसके उस प्रस्ताव को लेकर जिसमें निजी उच्च शिक्षण संस्थान गरीबों के लिए 25 प्रतिशत सीटें तो छोड़ देंगे, लेकिन फीस निर्धारण का अधिकार वे अपने हाथ में रखेंगे। सिंह ने कहा कि देश के वैज्ञानिकों ने निश्चित तौर पर कई उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। फिर भी इस क्षेत्र में पूरे विश्व से सहयोग के लिए भारत के दरवाजे खुले हैं।
इस मौके पर मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डी. पुरंदेश्वरी ने शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने पर खास जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में सरकार तो ज्यादा बेहतरी के प्रयास कर ही रही है, लेकिन निजी क्षेत्र के लिए भी इसमें बेहतर संभावनाएं हैं। उंन्होंने दोहराया कि सरकार उच्च व तकनीकी शिक्षा के लिए मजबूत और अधिकार संपन्न नियामक बनाने पर विचार कर रही है।