
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। पहले ही भाजपा के चुनावी एजेंडे पर आ चुके रामसेतु मुद्दे को सरकार के नए हलफनामे से नई ऊर्जा मिली है। पार्टी ने इसे ताजा राजनीतिक घटनाक्रम में द्रमुक के साथ नया 'डील' बताते हुए हलफनामे की भाषा को हिंदू भावनाओं से साथ खिलवाड़ करार दिया है। विश्व हिंदू परिषद ने भी भगवान राम द्वारा सेतु तोड़ने के सरकारी दावे की तीखी आलोचना करते हुए इसके खिलाफ आंदोलन करने की घोषणा की है।
अपना खोया वोट बैंक वापस पाने के लिए रामसेतु व अमरनाथ मुद्दों को धारदार बनाने में जुटी भाजपा के लिए संप्रग सरकार द्वारा सुप्रीमकोर्ट में पेश नया हलफनामा काफी मुफीद रहा है। पार्टी ने राम का अस्तित्व मानने व उनके द्वारा सेतु बनाने की सरकार की स्वीकारोक्ति पर तो खुशी जताई है, लेकिन उसे राम द्वारा तोड़ने व मैन के बजाय सुपरमैन द्वारा बनाने की दलील पर गहरी आपत्तिव्यक्त की है। पार्टी प्रवक्ता राजीव प्रताप रूड़ी ने कहा है कि हलफनामे की भाषा लाखों हिन्दुओं की भावना के साथ खिलवाड़ है। यह भगवान राम का अपमान है।
रूड़ी ने कहा कि यह हलफनामा भी सरकार के एक नए करार का हिस्सा है। वे एक नहीं कई करार कर अपनी सरकार की गाड़ी आगे बढ़ा रहे हैं। इस हलफनामे में भी द्रमुक को संतुष्ट करने का प्रयास किया गया है। पिछली बार की गलती से सबक लेते हुए इस बार का हलफनामा उच्च स्तर पर तैयार किया गया होगा, लेकिन छद्म धर्मनिरपेक्षता से पीड़ित सरकार ने फिर से हिंदू समाज की भावनाओं को आहत किया है।
विश्व हिंदू परिषद ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए रामसेतु मामले पर देशभर में आंदोलन की घोषणा की है। नए हलफनामे को सरकार का मानसिक दिवालियापन करार देते हुए परिषद ने इसके खिलाफ अपना आंदोलन तेज करने की घोषणा की है। इसके लिए वह जल्द ही अपने कार्यक्रमों की घोषणा करेगी। विहिप महासचिव प्रवीण तोगड़िया ने एक बयान में कहा है कि पहले सरकार ने उच्चतम न्यायालय में अपने शपथ पत्र में कहा था कि न भगवान राम है और न ही कोई रामसेतु। अब यही सरकार कह रही है कि रामसेतु भगवान राम ने ही तोड़ा था। सरकार के नए हलफनामे में भगवान राम के अस्तित्व को स्वीकार करने से सरकार की सहयोगी द्रमुक को हलका झटका माना जा रहा है। अभी तक द्रमुक भगवान राम का अस्तित्व नकारते हुए उनका उपहास उड़ाती रही है। केंद्र में नए बने सत्ता समीकरणों को भी इससे जोड़कर देखा जा रहा है।