
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। सरकारी बंगलों में अवैध कब्जे को गैर-जमानती अपराध बनाने के लिए आईपीसी की धारा 441 में संशोधन से सरकार के इनकार पर गुरुवार को सुप्रीमकोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई। कोर्ट ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए तीखी टिप्पणियां भी कीं।
गौरतलब है, सुप्रीमकोर्ट ने सरकारी बंगलों में वर्षों से अवैध कब्जा जमाये लोगों को बाहर निकालने के लिए सरकार को आईपीसी की धारा 441 में संशोधन कर इसे गैर जमानती अपराध बनाने का सुझाव दिया था। कोर्ट ने इस बाबत सभी राज्यों के भी सुझाव मंगाये थे। केन्द्र सरकार ने इस संबंध में कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा है कि आईपीसी में संशोधन करने की कोई जरूरत नहीं है, मौजूदा कानून काफी है।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बीएन अग्रवाल की पीठ ने सरकार के जवाब पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने यहां तक कहा कि सरकार ने उनके सुझाव पर गंभीरता से विचार नहीं किया है। सरकार इसलिए ऐसा नहीं करना चाहती क्योंकि बड़े अधिकारी इसमें शामिल हैं। कोर्ट ने कहा, ऐसे मसलों पर सचिव स्तर पर नहीं कैबिनेट स्तर पर निर्णय होना चाहिए। पीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि वे कैबिनेट को इस पर विचार करने का निर्देश भी दे सकते हैं।
कोर्ट ने ये तीखी टिप्पणियां केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सालीसिटर जनरल अमरेंद्र शरण की दलीलों पर की। शरण ने कहा कि सरकार ने सुझाव पर विचार किया है और निर्णय किया है कि आईपीसी की धारा 441 में संशोधन की कोई जरूरत नहीं है। सरकारी बंगलों में अवैध कब्जे का अपराध पब्लिक प्रिमाइसेस इवेक्शन एक्ट में आता है यहा आईपीसी की धारा 441 [गृह अतिचार] लागू नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा कि कुल 99 हजार सरकारी बंगलों में से सिर्फ तीन सौ बंगलों पर अवैध कब्जा है। ये संख्या बहुत ही कम यानी नहीं के बराबर है। पीठ उनकी दलीलों से संतुष्ट नहीं हुई और सुझाव को ठुकराने पर गहरी नाराजगी जताई। हालांकि कोर्ट ने कोई सख्त आदेश पारित नहीं किया और मामले को पांच अगस्त को अगली सुनवाई के लिए लगाने का निर्देश दिया।