
यवतमाल [महाराष्ट्र]। लोकसभा में विश्वास मत पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने जिस कलावती बंदुरकर का जिक्र किया था वह अब नेता बन गई हैं। अपनी भूख और गरीबी से लड़ने के लिए अब वह किसी बड़े नेता के सहयोग की मोहताज नहीं रह गई हैं। आखिर पूरी दुनिया में उनका नाम जो हो गया है। इसीलिए किसी बड़े नेता की बाट जोहने के बजाय खुद को ही संघर्ष के लिए तैयार कर लिया। किसानों को फसल ऋण और कर्जमाफी के लिए शुक्रवार को वह धरना पर बैठेंगी।
राहुल विदर्भ दौरे के दौरान 18 जुलाई को कलावती के घर गए थे। इसके बाद कलावती की गरीबी का उल्लेख उन्होंने लोकसभा में विश्वासमत के पक्ष में दिए अपने भाषण में किया था। तब कुछ विपक्षी सदस्यों ने कलावती के नाम का उल्लेख करने का विरोध भी किया था। उन्होंने कहा कि यवतमाल जिले के जालका गांव की कलावती भी भैंस कर्ज माफी और अपने घर में बिजली का कनेक्शन लगाने जैसी मांगों के लिए हमारे साथ धरना पर बैठेंगी। एक साल पहले उनके पति के आत्महत्या करने के बाद कई वीवीआईपी मेहमानों ने उनके घर का दौरा किया और उनकी समस्याएं हल करवाने का आश्वासन दिया था लेकिन किसी ने कुछ नहीं किया।
विदर्भ जनांदोलन समिति और शेतकरी संघर्ष समिति के संयुक्त आह्वान पर पंढरकावड़ा तहसील कार्यालय पर धरना दिया जाएगा। इसकी घोषणा वीजेएएस के किशोर तिवारी ने गुरुवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में की। तिवारी के अनुसार जिले में सहकारी बैंक किसी भी किसान को नई फसल के लिए ऋण नहीं जारी कर रहे हैं क्योंकि उनके पास कर्ज देने के लिए पर्याप्त धन नहीं है। तिवारी ने कहा कि हम अपनी मांगें पूरी करवाने के लिए धरना देंगे।