
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। आतंकवाद से लड़ने के लिए केंद्र सरकार पोटा जैसा कानूनी हथियार राज्य सरकारों को देने के लिए तैयार नहीं है। राज्यों की मांग को अनसुना कर रही केंद्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह और गृह मंत्री शिवराज पाटिल से मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, इसके बावजूद केंद्र सरकार अपने पुराने रुख पर पुनर्विचार के लिए राजी नहीं है।
अभी गुजरात में हुए विस्फोटों का खुलासा होने के तुरंत बाद मोदी ने महाराष्ट्र के मकोका जैसे कानून की पैरवी की थी। अपनी उसी बात को बल देने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री व गृह मंत्री से कहा कि 'महाराष्ट्र में आतंकवादियों के खिलाफ जिस कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है, वहां से 50 किलोमीटर दूर गुजरात में वह लागू नहीं है।' प्रधानमंत्री के साथ हुई मोदी की बैठक के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम.के. नारायणन भी मौजूद थे।
पोटा जैसा कानून न लगाने के केंद्र सरकार के रुख पर मोदी ने वोटबैंक की राजनीति का आरोप लगाते हुए अपने ही अंदाज में कटाक्ष किया। मोदी ने कहा कि 'तर्क दिया जाता है कि पोटा के रहते भी तो आतंकवादी घटनाएं होती रही हैं, लेकिन हत्या के जुर्म में भी तो मौत की सजा है। इसके बावजूद हत्याएं हो रही हैं तो क्या ताजीराते हिंद की दफा 302 भी हटा देनी चाहिए।'
इसके साथ ही मोदी ने प्रधानमंत्री से कहा कि 'तेजी से प्रगति कर रहे राज्य आतंकवादियों के निशाने पर हैं। गुजरात उनमें प्रमुख है।' गुजरात के मुख्यमंत्री ने ऐसे राज्यों की अलग बैठक बुलाने की मांग की। प्रधानमंत्री ने इसके लिए हामी भी भरी। यह पूछने पर कि क्या केंद्र सरकार भाजपा शासित राज्यों के साथ भेदभाव कर रही है? मोदी ने इतना ही कहा कि 'उम्मीद है कि प्रधानमंत्री इच्छाशक्ति दिखाते हुए इस दिशा में जल्द ही कोई कदम उठाएंगे।'
सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार मोदी के आग्रह पर आतंकवाद के खिलाफ हर तरह की मदद के लिए तैयार है, लेकिन राज्यों को पोटा की तर्ज पर कानून पर उसका रुख पुराना ही है। गृह मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने साफ कहा कि 'पोटा को मानवाधिकार हनन के आरोप पर संसद ने हटाया है। ऐसे में उस तरह का कानून अलग से हम राज्यों के लिए कैसे बना सकते हैं।' महाराष्ट्र में मकोका लागू होने पर उनका तर्क था कि 'वह कानून मनोहर जोशी सरकार के समय में पहले पारित हो गया था।'
गौरतलब है कि हर आतंकवादी घटना के बाद मुख्य विपक्षी दल भाजपा लगातार पोटा जैसे सख्त कानून को लागू करने की मांग करती रही है। भाजपा शासित राज्यों के साथ कांग्रेस व गैर भाजपा व कांग्रेस शासित राज्य भी केंद्र के पास आतंकवाद से लड़ने में सक्षम कानून के लिए प्रस्ताव भेज चुके हैं। इनमें प्रमुख रूप से गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश अपनी विधानसभाओं से कानून पारित कर केंद्र के अनुमोदन के लिए भेज चुके हैं। कांग्रेस शासित आंध्र प्रदेश सरकार भी केंद्र से इस तरह के कानून के लिए मंजूरी मांग रही है, लेकिन केंद्र टस से मस होने के लिए तैयार नहीं है।