
कोलकाता। सिंगुर में टाटा मोटर्स की लखटकिया कार नैनो के संयंत्र के नजदीक चल रहे आंदोलन को समाप्त करने के लिए राजभवन में राज्य सरकार और आंदोलन कर रहे विपक्षी दल के सदस्यों के बीच शनिवार को दूसरे दौर का विचार-विमर्श हुआ।
बैठक में हिस्सा लेने से पहले राज्य के उद्योग मंत्री निरुपम सेन ने पत्रकारों से कहा कि बातचीत में जो भी निर्णय निकलेगा सभी पक्षों को वह मान्य होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस मामले में किसी तरह का भेदभाव नहीं करेगी। बैठक में सेन राज्य सरकार के सात प्रतिनिधियों का नेतृत्व कर रहे है। बैठक में दूसरा पक्ष विपक्ष के नेता प्रथा चटर्जी के नेतृत्व में हिस्सा ले रहा है। विपक्ष की ओर से भी बैठक में सात सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल हिस्सा ले रहा है। विपक्षी सदस्यों में 22 संगठनों के एकीकृत मंच कृषि जोमी रक्षा कमेटी है।
तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी के नेतृत्व में केजेआरसी 24 अगस्त से सिंगुर में नैनो कारखाने के नजदीक अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन कर रहा है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि टाटा मोटर्स ने 997 एकड़ भूमि कारखाने के लिए ली है, जिसमें से 400 एकड़ भूमि जबरन कब्जाई गई है। उनकी मांग है कि किसानों की जबरन कब्जाई गई भूमि उन्हें लौटा दी जाए और उसके बदले कारखाने के सामने राजमार्ग के उस पास खाली पड़ी 500 एकड़ जमीन टाटा मोटर्स को दी जाए। बताया जाता है कि यह जमीन मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े एक बडे़ नेता के करीबी बिल्डर की है।
टाटा मोटर्स के प्रमुख रतन टाटा के संयंत्र को बदलने की संभावना से जुडे़ बयान आने के राज्यपाल गोपालकृष्ण गांधी ने इस विवाद को सुलझाने के लिए हस्तक्षेप किया है। उनकी ही पहल पर बातचीत का रास्ता अपनाया गया है। इस मामले में पहले दौर की बातचीत कल हुई थी और उसमें संकेत मिले कि सरकार और विपक्ष मामले को सुलझाने के लिए उचित रास्ता अपनाने पर विचार कर सकते हैं।