नई दिल्ली। महानगरों की व्यस्त जीवनशैली बच्चों की पढ़ाई पर भारी पड़ रही है। रोजी-रोटी की जद्दोजहद में पिता अपने बच्चों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पा रहे। एक सर्वे से पता चला है कि घर में पढ़ाई के दौरान केवल चार फीसदी पिता ही बच्चों की मदद करते हैं।
एसोचैम द्वारा कराए गए इस सर्वे में लखनऊ, चंडीगढ़, पुणे, बेंगलूर, अहमदाबाद और चेन्नई सरीखे बड़े शहरों के 4700 कामकाजी अभिभावक शामिल हुए। एसोचैम के महासचिव डीएस रावत ने बताया कि अभिभावकों से बात करने पर पता चला कि स्कूलों में पढ़ाई के नए तरीके अपनाए जाने के कारण भी कुछ पिता पढ़ाई में बच्चों की मदद नहीं कर पाते। पिता द्वारा बच्चों को समय नहीं दे पाने के कारण सारा बोझ मां पर आ पड़ता है। कामकाजी मां को आफिस के साथ ही घर और बच्चों का भी ख्याल रखना पड़ता है।
सर्वे के अनुसार केवल चार प्रतिशत पिता ही घर में बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देते हैं। सात फीसदी पिता कभी-कभार बच्चों को पढ़ाते हैं और 24 फीसदी लोगों ने कहा कि बच्चों के पूछने पर ही वह उनकी मदद करते हैं। 65 फीसदी प्रतिशत लोगों ने स्वीकार किया कि वह बच्चों की पढ़ाई में कोई मदद नहीं कर पाते।
महिलाओं के मामले में इसके उलट नतीजे देखने को मिले। 65 फीसदी कामकाजी महिलाओं ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई में वह उनका साथ देती हैं।