
भागलपुर [जागरण टीम]। कोसी के साथ-साथ शनिवार को अन्य छोटी-छोटी नदियां भी आहिस्ता-आहिस्ता नरम पड़ने लगी है। लेकिन बाढ़ प्रभावित सुपौल, पूर्णिया, सहरसा, किशनगंज, अररिया, फारबिसगंज में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। अब बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में महामारी की आशंका से लोग परेशान हैं।
कुछ क्षेत्रों में इससे मौतें भी हुई हैं। राहत सामग्री के लिये मारामारी शुरु हो गई है। सुपौल में नाव पलटने से सात लोग लापता हो गए हैं। अररिया जिले के रानीगंज व नरपतगंज प्रखंड में नाव पलटने की सूचना है। लेकिन इस पर सवार सभी लोग कुशल बाहर निकाल लिए गए। कटिहार के फलका में शनिवार को बरांडी थामस बांध के टूट जाने से कई क्षेत्रों में पानी प्रवेश कर गया है। बाढ़ में दो लड़की की मौत हो गई है।
खगड़िया से राहत सामग्री और चिकित्सीय टीम सुपौल और मधेपुरा भेजी गई है। इस बीच केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान,शरद यादव सहित कई नेताओं ने बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों का दौरा कर उनकी सुध ली।
अररिया जिले में नदियों के जलस्तर में लगातार गिरावट जारी है। बाढ़ पीड़ित धीरे-धीरे अपने आशियाने की ओर लौटने लगे है। शनिवार को रानीगंज प्रखंड के सरवाहा के पास नाव पलट गयी। उसी वक्त बोट लेकर भरगामा जा रहे फिल्म अभिनेता सुनील शेट्टी के जांबाज सिपाहियों ने तुरंत सभी को निकाल लिया।
उधर, नरपतगंज में शुक्रवार की शाम गेरूआ धार में नाव पलट जाने से बीच लोग डूबते-डूबते बचे। सभी को मछली मार रहे मछुआरों ने पानी से निकाला। वहीं जिले के बाढ़ प्रभावित नरपतगंज, भरगामा व रानीगंज प्रखंडों में स्थिति सामान्य हो रही है। सुरसर स्थित रेसक्यू कैम्प से 19वें दिन भी दुर्गम स्थानों पर फंसे बाढ़ पीड़ितों को बचाने की प्रक्रिया जारी है। जबकि फारबिसगंज-पूर्णिया-अररिया मार्ग अभी भी बाधित है।
सुपौल के त्रिवेणीगंज में डायरिया ने पूरे अनुमंडल क्षेत्र को अपने आगोश में ले लिया है। वहीं प्रतापगंज में 17 व्यक्तियों से लदी एक नाव के डूबने की सूचना है जिसमें 7 लोग लापता है। कटिहार के फलका में शनिवार को बरांडी थामस बांध के टूट जाने से कई क्षेत्रों में पानी प्रवेश कर गया है। बाढ़ में दो लड़की की मौत हो गई है। हलांकि जिले की सभी प्रमुख नदियां बरांडी को छोड़कर उतार पर रही है। बाड़ाक्षेत्र में पानी का बहाव एक लाख क्यूसेक से नीचे गिर जाने से कुसहा के पानी से प्रभावित इलाकों में तेज सुधार की उम्मीद है। बीते 24 घंटों में मुख्य कोसी में सुधार के कारण कुसहा से निकलने वाली पानी की मात्रा घटकर 81 हजार क्यूसेक तक रह गया है। बाड़ा क्षेत्रा में जलस्तर खतरे के निशान से 2 मीटर से भी अधिक नीचे आ गया है। यहां शनिवार सुबह पानी का बहाव 92 हजार क्यूसेक पाया गया। जबबि इसी समय वीरपुर में पानी का बहाव 15 हजार क्यूसेक रहा। 18 अगस्त को कुसहा में तटबंध टूटने की तुलना में आज बाहर निकल रहे पानी की मात्रा आधी से भी कम हो गयी है। सुबह 6.00 बजे कुरसेला रेल ब्रिज पर जलस्तर 9 सेमी उतर कर 30.23 मी. हो गया। मौसम विभाग के मुताबिक रविवार तक यहां जलस्तर करीब एक फीट और नीचे उतर जाने की उम्मीद है।
इधर गंगा का जलस्तर काढ़ागोला में 6 सेमी नीचे तथा रामायणपुर में 11 सेमी नीचे उतरा हे। महानंदा भी सभी स्थलों पर नीचे उतरी है।
पूर्णिया जिले में कोसी के बाद परमान,कनकई और महानंदा अब थमने लगी है। हर जगह से जलस्तर में कमी की खबर मिली है। अमौर में लगातार चल रहा कटाव भी शनिवार को थमा रहा।
सहरसा जिले के विभिन्न प्रखंडों में बाढ़ से घिरे लोगों को राहत नहीं मिल पाने के कारण हाहाकार मचा है। पानी के ठहराव के कारण जहां फंसे लोग अब घरों से निकलना नहीं चाहते। कुछ लोग अपने घर की ओर भी मुखातिब होने लगे है। फलस्वरूप प्रशासन की चिन्ता बढ़ने लगी है। गंदगी के सफाई नहीं होने और लोगों द्वारा जहां-तहां शौच किए जाने जाने के कारण महामारी की संभावना बढ़ गई है। उधर सौरबाजार प्रखंड क्षेत्र के कांप पूर्वी एवं पश्चिम पंचायत के बाढ़ पीड़ित लोगों ने शनिवार को प्रखंड मुख्यालय के सामने रोड जाम कर दिया। बाढ़ पीड़ितों ने कहा कि कांप पूर्वी एवं पश्चिम पंचायत का प्रखंड मुख्यालय से रोड सम्पर्क टूटा हुआ है। कांप-सौरबाजार के सड़क में चार जगह कटाव हो चुकी है। जहां छोटी-छोटी नाव की व्यवस्था है, जो कभी भी डूब जाती है। सड़क सम्पर्क के अभाव में हम लोगों को एक भी सरकारी सहायता नहीं मिल रही है और बाढ़ पीड़ित लोग भुखमरी के कगार पर पहुंच चुके हैं। बाढ़ पीड़ित का गुस्सा सबसे पहले प्रखंड प्रमुख योगेंद्र राम को झेलना पड़ा।
इसी दौरान डीएम आर लक्ष्मण पुलिस अधीक्षक कुंवर सिंह पहुंचे और स्थिति को संभालते हुये बाढ़ पीड़ितों को सभी सरकारी सुविधा शीघ्र उपलब्ध कराने के आश्वासन के बाद माहौल शांत हुआ। खगड़िया में बूढ़ी गंडक समेत गंगा व कोसी के जलस्तर में कमी आने से जहां बाढ़ का पानी घटा है। वहीं शनिवार को जिला प्रशासन की ओर से एक ट्रक खाद्यान्न मधेपुरा बाढ़ पीड़ितों के लिए भेजा गया। उक्त ट्रक को डीएम यूएन ठाकुर ने अपने आवास से रवाना किया। उधर सिविल सर्जन डा. उदयचंद्र मिश्र ने शनिवार को तीसरा चिकित्सा दल मधेपुरा और सुपौल के लिए रवाना किया।
मधेपुरा में अभी भी बाढ़ पीड़ितों की मुसीबतें कम नहीं हुई है। इस बीच शनिवार को तीन महिलाओं के मौत की खबर है।
लूट-खसोट रोकने को हजारों जवान तैनात
अल्हड़ कोसी नरम पड़ने लगी है। वराह क्षेत्र से उसका डिस्चार्ज शनिवार को घटकर 91 हजार 450 क्यूसेक पहुंच गया। बैराज से 14,621 क्यूसेक पानी जा रहा है। बाढ़ से वीरान हुए इलाकों में लूट-खसोट रोकने को सरकार ने 3533 अतिरिक्त पुलिस के जवान तैनात किए हैं। पानी घटने के साथ फैलने वाली बीमारियों को देखते हुए वहां सरकार को फोकस स्वास्थ्य व्यवस्था को चुस्त करने की ओर शिफ्ट कर गया है। आज इलाके में यूनिसेफ व दूसरे चिकित्सकों की टोली भेजी गयी है।
स्वास्थ्य के मोर्चे पर आंध्र प्रदेश सरकार भी आगे आई है। मुख्यमंत्री वाई राजशेखर रेड्डी ने एक लाख बेडशीट, राजीव आरोग्यश्री की 20 एंबुलेंस के साथ डाक्टर, नर्स और दवाइयां आज बिहार भेजी हैं। दो-तीन दिनों में यह टीम पहुंच जायेगी। सैप के जवान भी सुरक्षा में लगाए गए हैं। इसके साथ होमगार्ड के जवान भी लगाए गए हैं। राहत व बचाव की कमान सेना व एनडीआरएफ के हाथों में है। मधेपुरा में 1800, सुपौल में 700, सहरसा में 200, अररिया में 800, पूर्णिया में 500 सेना के जवान मोटरबोट के साथ लगे हैं। एनडीआरएफ के 655 जवान भी है।
इस बीच मधेपुरा में लोग अपने घरों को लौटने लगे हैं। ध्यान रहे, खतरा टला नहीं है। कोसी फिर करवट ले सकती है। उसकी चरम क्रीड़ा का समय अक्टूबर का पहला सप्ताह है। मधेपुरा के विशेष जिला पदाधिकारी अरविंद कुमार चौधरी का कहना है कि पानी घटता देख लोग घर छोड़ना नहीं चाह रहे।