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प्रतिरक्षा को मिलेगी परमाणु की ऊर्जा

Sep 07, 02:37 am
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नई दिल्ली [जरनैल सिंह]। याद है वो क्रायोजनिक इंजन। अमेरिका ने रूस को ऐसी आंखें दिखाई कि वह भारत को देने की हिम्मत नहीं जुटा पाया था। हमें 15 साल लग गए स्वदेशी क्रायोजनिक बनाते-बनाते। रूस ने जैसे-तैसे दो परमाणु ऊर्जा रिएक्टर तो बना दिए, पर कुडनकुलम में चार और लगाने के लिए एनएसजी का मुंह ताक रहा है। डीआरडीओ की मिसाइल परियोजनाएं लंबित होती गई तो कुछ हद तक वजह यह प्रतिबंध भी थे। भारत के वैज्ञानिक और रक्षा परियोजनाएं काली सूची में डाल दी गई थीं। लेकिन अब तस्वीर पलट गई है। परमाणु ऊर्जा के साथ ही रक्षा परियोजनाओं के लिए भी राह आसान हो जाएगी।

विशेषज्ञों की मानें तो इस मंजूरी के साथ ही भारत रूस, फ्रांस समेत तमाम देशों के साथ परमाणु व्यापार के लिए आजाद हो गया है। हालांकि भारत ने कह रखा है कि वह अमेरिकी कांग्रेस में मंजूरी तक इंतजार करेगा, लेकिन बात साफ है कि अब अमेरिकी कांग्रेस में मंजूरी न भी मिले तो भारत के लिए बाकी दुनिया के साथ परमाणु व्यापार के रास्ते खुल गए हैं। इससे अमेरिका पर दबाव बढ़ जाएगा कि वह जल्द से जल्द 123 समझौते पर अमेरिकी कांग्रेस से अनुमति दिलाए ताकि भारत के साथ परमाणु व्यापार का अवसर हाथ से न निकल जाए।

सरकार की मानें तो भारत के परमाणु ऊर्जा रिएक्टर यूरेनियम की कमी से जूझ रहे हैं। आलम यह है कि कई रिएक्टर अपनी क्षमता के 30 फीसदी का भी इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। प्रतिबंधों के चलते दूसरे देशों से परमाणु मैटीरियल भी नहीं मिल सकता। भारत में थोरियम के भंडार तो हैं पर उन्हें परमाणु रिएक्टर चलाने लायक बनाने में अभी दो दशक भी लग सकते हैं। तब तक क्या होगा? यही सोच कर भारत ने यह दांव खेला है जिसमें सैन्य परमाणु रिएक्टर अलग कर दिए जाएंगे और आयातित परमाणु मैटीरियल का केवल सिविल इस्तेमाल ही किया जाएगा।

भारत चाहे तो 'परमाणु ऊर्जा रिजर्व' भी बना सकता है। विश्व के परमाणु 'चौधरियों' को यह आश्वासन दे दिया गया है कि वह दुनिया से मिलने वाली परमाणु ऊर्जा और तकनीक का इस्तेमाल बम बनाने में नहीं करेगा। परमाणु ऊर्जा व्यापार की छूट मिलते ही परमाणु ऊर्जा को 2030 तक दोगुना कर 40,000 मेगावाट तक ले जाया जाएगा।

महत्वपूर्ण यह भी है कि एनएसजी ने सिर्फ भारत के लिए अपने नियम कायदों को बदला है। भले चीन की कम्युनिस्ट पार्टी इसकी आलोचना करे या पाकिस्तान चिल्लाए, पर यह बदलाव साबित कर रहा है कि भारत एक परमाणु शक्ति है। उस पर एनपीटी हस्ताक्षरकर्ता देशों वाली शर्ते लागू नहीं होतीं पर वह परमाणु अप्रसार में दुनिया के प्रयासों को पूरा सहयोग देगा।

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