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पूछिये न हाल इन मेहमानों का

Sep 07, 12:41 pm
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लखनऊ, [नदीम]। तैत्रेय उपनिषद में अतिथि को देव का दर्जा दिया गया है। इस्लामी किताबों में भी मेहमान को बरकत की निशानी बताया गया है। शायद यही वजह है कि माजिद देवबंदी जैसा शायर यह कहने को मजबूर हुआ-अल्लाह कहीं मेरे घर से बरकत न चली जाए, दो दिन से घर में कोई मेहमान नहीं है।

लेकिन उत्तार प्रदेश सरकार के लिए ये 'मेहमान' परेशानी का सबब हैं। राज्य की राजधानी के राजकीय अतिथि गृहों में वे रुकते हैं, खाते-पीते हैं और बगैर भुगतान किए चले जाते हैं। अतिथि गृहों के बकायेदारों की सूची रोज बढ़ती जा रही है। तमाम मेहमान तो ऐसे हैं, जिन्हें अब सरकार चाह कर भी तलाश नहीं पा रही है। बाकायदा लिखा-पढ़ी में उनके नाम के आगे दर्ज कर दिया गया है कि उनका कोई पता-ठिकाना नहीं मिल रहा। जिन मेहमानों के पते सरकार के पास हैं भी, उन्हें नोटिस दर नोटिस भेजी जा रही है, लेकिन वे संज्ञान लेना जरूरी नहीं समझ रहे। इस फेहरिस्त में कोई आम लोग नहीं हैं, बल्कि मोतीलाल वोरा, चौधरी अजित सिंह, श्रीप्रकाश जायसवाल, शरद यादव, वीसी शुक्ला, सलमान खुर्शीद, मोहसिना किदवई, बूटा सिंह, मुख्तार अब्बास नकवी, राज बब्बर, सुबोधकांत सहाय, अनुराधा चौधरी, जितिन प्रसाद, रीता बहुगुणा जोशी जैसे नामचीन नेता हैं, तो जेएन चैंबर, अनिल कुमार, अशोक कुमार, दीपा बगई, के रवींद्र नायक, बीबी सिंह विश्वेन, अतुल बगई, भोलानाथ तिवारी, शैलेष कृष्ण, मनोज कुमार, राजीव गुप्ता, पीसी शर्मा, आरके सिंह, अजित सेठ, हरभजन सिंह, प्रदीप शुक्ला, सीके शर्मा, बीएस नंदा, नसीम जैदी, सुनंदा प्रसाद, पीके झा, हरीश चंद्रा, श्रीमती अनीता शर्मा, यूपी सिंह, देव दत्ता, सुनील पालीवाल जैसे अफसर भी हैं।

मंत्रियों में लालजी वर्मा, राम अचल राजभर, राकेशधर त्रिपाठी, रंगनाथ मिश्र, अनंत कुमार मिश्र, बादशाह सिंह, जयवीर सिंह, फागू चौहान, फतेह बहादुर सिंह, हरिओम उपाध्याय, विनोद सिंह, दद्दन मिश्रा, राम प्रसाद चौधरी, फतेहबहादुर सिंह, अशोक दोहरे, लखीराम नागर के नाम हैं, तो वकील और न्यायिक सेवा के अधिकारी भी बकायेदारों में हैं। सांसदों, विधायकों, पूर्व मंत्रियों की संख्या तो इतनी ज्यादा है कि गिनती करना ही दुश्वार है। यहां तक कि चुनाव के समय केंद्रीय निर्वाचन आयोग के पर्यवेक्षक के रूप में जो अफसर उप्र पहुंचे, उन्होंने भी चलते समय भुगतान करना जरूरी नहीं समझा।

जरा कुछ मेहमानों पर नजर डालिए- सीबीआई के एसपी एमजे अख्तर, डिप्टी एसपी योगेंद्र सिंह, इंस्पेक्टर आर गैम्ब एक अप्रैल 98 से 31 मार्च 2000 तक लखनऊ के डालीबाग स्थित वीआईपी गेस्ट हाऊस में रुके और लगभग दस लाख रुपये बकाया कर चलते बने। इन्हें नोटिस पर नोटिस जा रहे हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं। जून 2003 से अब तक अतिथि गृह के चार कमरों में सीबीआई अफसर टिके हुए हैं। अब तक उन पर 38 लाख रुपये बकाया हो चुके हैं। विधायक संदीप अग्रवाल भी इसी गेस्ट हाउस के तीन लाख आठ हजार रुपये के बकायेदार हैं। लखनऊ में अपनी तैनाती के दौरान सीओ हजरतगंज रहे रवींद्र कुमार सिंह ने भी पांच दिन सरकारी अतिथि गृह का लुत्फ उठाया और 11737 रुपये बकाया कर चलते बने। राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष आशीष कुमार मैसी दस जनवरी 02 से पांच अगस्त 02 तक राज्य अतिथि गृह में ठहरे। 90 हजार रुपये का बकाया किया और चलते बने। अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष रहे सतीशचंद्र जाटव 28 जून 07 से 20 जुलाई 07 तक वीआईपी गेस्ट हाउस डालीबाग में ठहरे और भुगतान नहीं किया। उन पर दस हजार रुपये बकाया हैं। ब्रजपाल सिंह शाक्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य रहे हैं। एक अप्रैल 98 से 31 मार्च 2000 तक गेस्ट हाऊस में रुके। उनका तीन लाख रुपये से अधिक का बिल बकाया है।

संयुक्त सचिव आरके भटनागर ने भी बगैर पैसे दिए आरामतलबी की। उन पर 39 हजार रुपये बकाया हैं। एमएलसी रहे लाल सिंह तोमर पर भी डेढ़ लाख रुपये बकाया हैं। पिछड़ा वर्ग वित्ता आयोग के अध्यक्ष रहे अयोध्या प्रसाद पाल पर डेढ़ लाख रुपये बाकी हैं, तो उप्र विधान परिषद के सदस्य रहे भगत सिंह कोश्यारी पर एक लाख 30 हजार का बकाया है। लखनऊ के सहायक आयुक्त रहे केएम पांडे भी 33 हजार रुपये के बकायेदार हैं। मंत्री रहे वीरेंद्र सिंह पर एक लाख 13 हजार, बीज निगम के अध्यक्ष रहे दान सिंह रावत पर 64 हजार रुपये बाकी हैं। जूडिशियल मजिस्ट्रेट रमाशंकर ओझा पर भी 8648 रुपये बाकी चल रहे हैं, जबकि संयुक्त सचिव चक्रपाणि 39 हजार रुपये के बकायेदार हैं। आईएएस आरएस यादव

ने भी 12 हजार रुपये का भुगतान नहीं किया है। विशेष सचिव, गृह रहे राजीव कुमार पर भी 1124 रुपये बकाया हैं। अगस्त 95 में मुख्यमंत्री की सुरक्षा में तैनात रहे डिप्टी एसपी आरएन गौतम ने भी 1100 रुपये का भुगतान नहीं किया। मुख्यमंत्री कार्यालय में सूचना अधिकारी रहे

दिनेश गर्ग भी 20 अप्रैल 95 से 20 जुलाई 95 तक अति विशिष्ट अतिथि गृह में ठहरे। उन का 4784 रुपये का बिल बना, लेकिन उंन्होंने भुगतान नहीं किया। डी सत्यमूर्ति, एमएस रविशंकर, एचपी साहू, जनक डिगाल, एचवी पाश्‌र्र्वनाथ, एस दिलीप सिंह, वीवी यादव, वीएस रामाप्रसाद, श्रीकांत पंकज, एसएन पाल, एसपी साहू, एसएम फैजुल्लाह, संजीव वर्मा, राधेश्याम, एके गोयल, शंकर नयनपाल, जेपी गुप्ता,संजय कुमार, राम निवास, एससी कोटिया रानी जार्ज, शिव शैलम, सुनील पालीवाल, जीतेश नगौरी, दिनेश कुमार गोयल भारतीय प्रशासनिक सेवा के वे अधिकारी हैं, जो पर्यवेक्षक के रूप में लखनऊ आए थे। गेस्ट हाऊस में रुके, लेकिन भुगतान नहीं किया।

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