अधिकांश पिता नहीं रखते बच्चों के होमवर्क पर नजर

 
Sep 07, 01:28 pm

नई दिल्ली। महिलाओं की स्वतंत्रता ने कामकाजी महिलाओं के लिए भले ही एक नए युग के द्वार खोल दिए हैं, लेकिन बच्चों की परवरिश के मामले में उनके पति अब भी कम ही योगदान देते हैं। ऐसे सिर्फ चार प्रतिशत पिता हैं जो अपने कार्यालय का काम निपटाने के बाद बच्चों के होमवर्क के लिए समय निकाल पाते हैं।

एसोचैम सामाजिक विकास संगठन [एएसडीएफ] के तत्वावधान में बच्चों के प्रति आधुनिक पिताओं की स्थिति पर किए गए एक नए सर्वेक्षण में कहा गया है कि पिता बच्चों की परवरिश के मामले में अक्सर नौकरी या व्यवसाय में अत्यधिक व्यस्तता जैसा कोई न कोई बहाना बना देते हैं, जिससे कामकाजी महिलाओं को अपने बच्चों को ट्यूशन केंद्रों और क्रेच भेजने पर मजबूर होना पड़ रहा है। अध्ययन में महानगरों तथा आसपास के शहरों के चार हजार 700 से अधिक कामकाजी माता पिता शामिल किए गए।

सर्वेक्षण में लखनऊ, चंडीगढ़, पुणे, बेंगलूर, अहमदाबाद, उदयपुर, शिमला, देहरादून, इंदौर, पटना, कोचीन और चेन्नई जैसे सभी महानगर शामिल किए गए। सर्वेक्षण में खुलासा हुआ है कि सिर्फ चार प्रतिशत पिता ही अपने कार्यालय से संबंधित काम पूरा करने के बाद अपने बच्चे के होमवर्क के लिए समय निकाल पाते हैं। अध्ययन में शामिल 96 प्रतिशत पिताओं ने अपने बच्चों के लिए समय न निकाल पाने का कारण अपनी वर्तमान नौकरी या व्यवसाय को बताया।

परिणामस्वरूप बच्चों की परवरिश का सारा बोझ महिलाओं पर आन पड़ता है, जिन्हें आफिस और घर के कामों में संतुलन बिठाने तथा बच्चों की मांगों के दबाव के चलते भारी मुश्किल का सामना करना पड़ता है। इस कारण बच्चों को कोचिंग सेंटरों और क्रेच भेजे जाने से ऐसे परिवारों के बजट पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। 96 प्रतिशत कामकाजी पिताओं में से सात प्रतिशत ने कहा कि वे अपने बच्चों की कभी कभार मदद करते हैं। 24 प्रतिशत पिताओं ने कहा कि वे अपने बच्चों की मदद सिर्फ उस समय करते हैं जब बच्चे उनसे कुछ पूछते हैं। 65 प्रतिशत पिताओं ने कहा कि उन्होंने अपने बच्चों के होमवर्क में कभी मदद नहीं की।

दूसरी ओर, पिताओं की तुलना में 65 प्रतिशत माताएं रोजाना अपने बच्चों के होमवर्क में मदद करती हैं। 21 प्रतिशत माता पिताओं ने कहा कि वे अपने बच्चे द्वारा किए जाने वाले काम को नहीं समझते। 10 प्रतिशत ने कहा कि कुछ आज ऐसे विषय हैं जो उन्हें स्कूली दिनों में नहीं पढ़ाए गए थे।




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